Rajasthan Folk Art: कच्छी घोड़ी की ताल पर थिरकी नई पीढ़ी, संगत–15 में बच्चों ने लिया लोक संस्कृति का आनंद
Ananya soch: Rajasthan Folk Art
अनन्य सोच। Kachhi Ghodi Dance: लोक संगीत, नृत्य और कठपुतली कला के रंगों से सजा दृश्य उस समय जीवंत हो उठा, जब कच्छी घोड़ी की ताल और लोक गायकों के सुरों पर बच्चों का उत्साह चरम पर पहुंच गया. (Kathputli Show) खुशी से शोर मचाते, कठपुतली को अपने हाथों से छूकर रोमांचित होते और नृत्य की लय में थिरकते बच्चों के बीच जब अनारकली बनी कठपुतली नाचने लगी, तो पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा. यह मनमोहक नजारा था नई पीढ़ी को लोक संस्कृति से जोड़ने वाले आयोजन ‘संगत–15’ का.
People’s Media Theatre के बैनर तले राजस्थान फॉरम और श्री सीमेंट के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम का आयोजन मान्यावास स्थित श्री राम यूनिवर्सल विद्यालय में किया गया. यहां शक्ति कठपुतली भाट और उनके साथियों ने ‘काठ के रंग’ कार्यक्रम के तहत बच्चों के साथ संवाद करते हुए विविध लोक करतबों का शानदार प्रदर्शन किया. उनके साथ लोक कलाकार नितिन कालेट, सौरभ भट्ट, सुभाष, कालू भट्ट और दीपक भाट ने अपने गायन और वादन से समां बांध दिया.
(Cultural Program Jaipur) कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए राजस्थान फॉरम के एग्जीक्यूटिव मेंबर अशोक राही ने बताया कि संगत श्रृंखला के माध्यम से अब तक 80 से अधिक लोक कलाकारों की प्रतिभा को हजारों छात्र–छात्राओं ने देखा और सराहा है. पीएमटी की महासचिव सुप्रिया शर्मा ने संगत की प्रेरणा के लिए प्रख्यात संस्कृतिकर्मी संदीप भूतोडिया, राजस्थान फॉरम के अध्यक्ष एवं ग्रैमी अवार्ड विजेता पंडित विश्व मोहन भट्ट तथा कार्यकारी सचिव अपरा कुच्छल के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर अनेक संस्कृति कर्मी भी उपस्थित रहे.