राजस्थान में डेयरी क्रांति की नई उड़ान: 1500 करोड़ की केंद्रीय सहायता से मजबूत होगा सरस नेटवर्क, बढ़ेगी दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता
अनन्य सोच। राजस्थान में डेयरी क्षेत्र के व्यापक विस्तार और आरसीडीएफ के “सरस” ब्रांड को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma की पहल पर केंद्र सरकार ने राजस्थान को डेयरी विकास परियोजनाओं के लिए करीब 1500 करोड़ रुपये की सहायता देने पर सैद्धांतिक सहमति प्रदान की है। यह सहायता जीका (जापान इंटरनेशनल कॉर्पोरेशन एजेंसी) परियोजना के तहत 1000 करोड़ रुपये और नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट (NPDD) के अंतर्गत 500 करोड़ रुपये के रूप में मिलेगी।
मुख्य सचिव V. Srinivas की अध्यक्षता में मंगलवार को शासन सचिवालय में आयोजित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में डेयरी विस्तार से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों पर चर्चा हुई। बैठक में राज्य में दुग्ध संकलन, प्रसंस्करण और विपणन तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की रणनीति तय की गई।
प्रतिदिन 65 लाख लीटर तक पहुंचेगा दुग्ध संकलन
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में आरसीडीएफ द्वारा प्रतिदिन लगभग 45 लाख लीटर दूध का संकलन किया जा रहा है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही, राज्य की दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता में 20 लाख लीटर प्रतिदिन की अतिरिक्त वृद्धि की जाएगी।
मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य सरकार “सरस” को केवल एक डेयरी सहकारी संस्था तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर के मजबूत डेयरी ब्रांड के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। उन्होंने राज्यभर में नए डेयरी प्लांट, सरस पार्लर और आउटलेट खोलने के निर्देश दिए।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि राजस्थान में दुग्ध उत्पादन, संकलन, प्रसंस्करण और विपणन की एकीकृत वैल्यू चेन विकसित की जाए, जिससे दुग्ध उत्पादकों और ग्रामीण किसानों की आय में वृद्धि हो सके।
केंद्र सरकार के मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के सचिव Naresh Pal Gangwar ने राजस्थान में डेयरी परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन की सराहना करते हुए कहा कि “सरस” को राष्ट्रीय ब्रांड बनाने में केंद्र सरकार हरसंभव सहयोग करेगी। उन्होंने पशुधन की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सुधार को डेयरी विकास की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
जनजातीय और सूखा क्षेत्रों को विशेष सहायता
बैठक में केंद्र सरकार ने जनजातीय एवं सूखा प्रभावित क्षेत्रों में दुग्ध संकलन बढ़ाने के लिए विशेष सहायता देने पर भी सहमति जताई। इसके तहत नए बल्क मिल्क कूलर, नस्ल सुधार कार्यक्रम और पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जाएगा।
आरसीडीएफ की प्रबंध निदेशक Shruti Bhardwaj ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से बताया कि राजस्थान वर्तमान में दुग्ध उत्पादन और प्रति व्यक्ति दुग्ध उपलब्धता के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। राज्य में 20 हजार से अधिक डेयरी सहकारी समितियां ग्रामीण स्तर पर किसानों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचा रही हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर फैलेगा सरस नेटवर्क
बैठक में यह भी तय किया गया कि राजस्थान के साथ-साथ दिल्ली, हरियाणा, एनसीआर, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में भी सरस नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों, सरकारी कार्यालयों, शिक्षण संस्थानों और अस्पतालों में नए सरस बूथ, पार्लर और सरस प्लाजा स्थापित किए जाएंगे। इससे “सरस” को राष्ट्रीय ब्रांड के रूप में नई पहचान मिलने की उम्मीद है।