जब एक मंच पर उतरी Madhubani, Gond, Pithora और Miniature Art की दुनिया: जयपुर में शुरू हुआ अनोखा Folk & Contemporary Art Camp
14 राज्यों के 20 दिग्गज कलाकार रच रहे सृजन का महाकुंभ, दर्शकों को पहली बार Live Art Creation देखने का मौका
अनन्य सोच। कला, संस्कृति और सृजनशीलता का अद्भुत संगम इन दिनों जयपुर में देखने को मिल रहा है। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर और पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय Folk & Contemporary Art Camp का शुभारंभ हो गया है। 1 से 5 जून तक चलने वाले इस विशेष शिविर में देश के 14 राज्यों से आए 20 प्रतिष्ठित कलाकार अपनी कला का जीवंत प्रदर्शन कर रहे हैं।
यह शिविर केवल एक प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारतीय कला परंपराओं और आधुनिक अभिव्यक्तियों के बीच संवाद का सशक्त मंच बनकर उभरा है। यहां 10 कलाकार Folk & Traditional Art का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं, जबकि 10 कलाकार Contemporary Art की नई संभावनाओं को सामने ला रहे हैं।
शिविर के प्रमुख आकर्षणों में पद्मश्री सम्मानित परेश राठवा (Pithora Art), दुलारी देवी (Madhubani Art) और शाकिर अली (Mughal Miniature Art) शामिल हैं। वहीं प्रसिद्ध Gond Art परंपरा को आगे बढ़ा रहे मयंक श्याम भी अपनी विशिष्ट कला शैली का प्रदर्शन कर रहे हैं।
Contemporary Art वर्ग में सुब्रत मंडल, नंदलाल ठाकुर, मुरली चीरोथ, पी.सी. किशन, चरण शर्मा, दिलीप शर्मा, प्रमोद आर्य, रामगोपाल खुमावत, केतकी राय चौधरी और जयपुर के चर्चित टेराकोटा एवं दृश्य कलाकार डॉ. चन्द्रशेखर सैन अपनी रचनात्मक कृतियों के माध्यम से दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं।
वहीं Traditional Art खंड में समुद्र सिंह खंगारोत की Miniature Art, खगेन गोस्वामी की Mask Art, भास्कर चित्रकार की Kalighat Painting, नाजिदा खातून की Sikki Art तथा बब्बन पाल की पारंपरिक कला दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विविधता से परिचित करा रही है।
इस शिविर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां कई ऐसी लोक कलाओं को देखने का अवसर मिल रहा है जिन्हें राजस्थान के अधिकांश दर्शकों ने पहले कभी प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा। कलाकारों को Live Art Creation करते हुए देखना, उनकी तकनीकों को समझना और कला के पीछे छिपी सांस्कृतिक विरासत को जानना दर्शकों के लिए अनूठा अनुभव बन रहा है।
इस कला शिविर की संकल्पना और क्यूरेशन निखत अंसारी द्वारा किया गया है। उनका उद्देश्य देश की लोक, पारंपरिक और समकालीन कला परंपराओं को एक साझा मंच पर लाकर कला संवाद को नई दिशा देना है।
प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 7 बजे तक आयोजित यह शिविर विद्यार्थियों, शोधार्थियों, कला प्रेमियों और परिवारों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। आयोजकों ने आमजन से इस अनूठे Art Festival का हिस्सा बनकर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को करीब से अनुभव करने की अपील की है।