अब मौसम की हर बूंद पर सरकार की नजर! 16 हजार से ज्यादा जगहों पर लगेंगे हाईटेक यंत्र, किसानों को मिलेगा सीधा फायदा
खेत में बारिश कब होगी, फसल कितनी सुरक्षित है और नुकसान होने पर पैसा कितनी जल्दी मिलेगा — इन सभी सवालों का जवाब अब मिलेगा टेक्नोलॉजी से। सरकार ने एक ऐसा नेटवर्क तैयार करना शुरू किया है, जो किसानों की तकदीर बदल सकता है। जानिए पूरी योजना।
अनन्य सोच। केंद्र सरकार ने मौसम सूचना नेटवर्क एवं डेटा प्रणाली (WINDS) के तहत एक बड़ी पहल शुरू की है, जिसका मकसद फसल बीमा, कृषि परामर्श (Agri Advisory) तथा आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक हाइपरलोकल मौसम आंकड़े (Hyperlocal Weather Data) तैयार करना है। इसके लिए देशभर में स्वचालित मौसम केंद्रों (Automatic Weather Stations - AWS) और स्वचालित वर्षामापी यंत्रों (Automatic Rain Gauges - ARG) का राष्ट्रीय नेटवर्क खड़ा किया जा रहा है।
अब तक असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड — इन 7 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने WINDS को अपनाया है। इन राज्यों में 16,843 स्थलों पर इंस्टालेशन की मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 1,188 जगहों पर सिविल कार्य पूरा हो चुका है और 892 AWS/ARG यंत्र लगाए जा चुके हैं।
इसके साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत फसल क्षति के सटीक आकलन के लिए टेक्नोलॉजी आधारित उपज आकलन प्रणाली यस-टेक (YES-TECH) को खरीफ 2023 से लागू किया गया है, जो रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) के जरिए फसल की उपज का आकलन करती है। धान और गेहूं के लिए यह खरीफ 2023 से, जबकि सोयाबीन के लिए खरीफ 2024 से शुरू की गई, जिसमें उपज आकलन को 30% वेटेज अनिवार्य रूप से दिया गया है। साल 2025-26 में यस-टेक को 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू किया गया। खास बात यह है कि मध्य प्रदेश ने इसे 100% वेटेज दिया है, जबकि महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश ने 50% तथा ओडिशा-कर्नाटक ने 40% वेटेज दिया है।
दावों के समयबद्ध निपटान के लिए सरकार ने राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) और डिजीक्लेम मॉड्यूल (DigiClaim Module) विकसित किया है। खरीफ 2024 से यदि बीमा कंपनी समय पर भुगतान नहीं करती, तो 12% जुर्माना स्वतः लगाया जाता है — वहीं राज्य सरकार की देरी पर भी खरीफ 2025 से यही नियम लागू है। इसके अलावा एस्क्रो अकाउंट (Escrow Account) खोलना और क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (CLAP) का उपयोग सभी राज्यों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा (Rajya Sabha) में एक लिखित जवाब के दौरान दी।