-42°C में भी नहीं जमेगा Diesel! Indian Army का स्वदेशी XWG Fuel बना Border Operations का नया गेमचेंजर
Indian Army ने Atmanirbhar Bharat की दिशा में बड़ी छलांग लगाते हुए ऐसा Extreme Weather Grade (XWG) Diesel लॉन्च किया है, जो -42°C तक भी नहीं जमेगा। यह नई Fuel Technology सियाचिन जैसे बर्फीले इलाकों में जवानों के Military Vehicles को हर मौसम में ऑपरेशनल बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
अनन्य सोच। देश की रक्षा क्षमता को नई मजबूती देते हुए Indian Army ने स्वदेशी Extreme Weather Grade (XWG) Diesel लॉन्च किया है। यह अत्याधुनिक Fuel खासतौर पर उन इलाकों के लिए विकसित किया गया है, जहां तापमान -42 Degree Celsius तक पहुंच जाता है। ऐसे हालात में सामान्य Diesel जमने लगता है और वाहनों के Fuel Filter चोक होने से इंजन स्टार्ट करना मुश्किल हो जाता है। अब नई तकनीक इस चुनौती का स्थायी समाधान लेकर आई है।
Army Chief General Dhiraj Seth ने नई दिल्ली में इस स्वदेशी XWG Diesel का औपचारिक शुभारंभ किया। इसे Indian Army और Oil Marketing Companies (OMCs) ने करीब एक वर्ष के संयुक्त प्रयास से विकसित किया है। यह उपलब्धि Atmanirbhar Bharat अभियान को नई मजबूती देने वाली मानी जा रही है।
सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह Extreme Weather Fuel -42°C तक भी बिना जमे प्रभावी तरीके से काम करता है। इससे Siachen Glacier, Ladakh और अन्य High Altitude Areas में तैनात सेना के वाहनों की Operational Readiness हर समय बनी रहेगी। अब जवानों को कड़ाके की ठंड में वाहन चालू रखने के लिए अतिरिक्त प्रयास नहीं करने पड़ेंगे।
यह नया XWG Diesel BS-6 Emission Standards और IS-1460:2025 Specifications के अनुरूप तैयार किया गया है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि सेना के मौजूदा Vehicle Fleet में इसे बिना किसी तकनीकी बदलाव या अतिरिक्त मंजूरी के सीधे इस्तेमाल किया जा सकेगा।
लॉन्च के दौरान Army Chief ने इसे भारतीय रक्षा क्षेत्र के लिए "Revolutionary Indigenous Innovation" बताया। उन्होंने कहा कि यह तकनीक न केवल मिशन की सफलता और सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाएगी, बल्कि कठिन परिस्थितियों में सेना की प्रतिक्रिया क्षमता को भी मजबूत करेगी।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस Fuel Technology का लाभ High Altitude Regions में रहने वाले आम नागरिकों और वहां संचालित आवश्यक सेवाओं को भी मिल सकता है। ऐसे में यह स्वदेशी नवाचार केवल सेना ही नहीं, बल्कि देश के दुर्गम क्षेत्रों के लिए भी एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।