देश की तिजोरी में रिलायंस का ‘मेगा योगदान’: हर ₹100 कमाई में ₹47 सरकार को, CSR खर्च भी पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर

10 साल में ₹15 लाख करोड़ से ज्यादा का राष्ट्रीय योगदान; शिक्षा, गांव और महिलाओं पर बढ़ा फोकस

May 28, 2026 - 18:10
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देश की तिजोरी में रिलायंस का ‘मेगा योगदान’: हर ₹100 कमाई में ₹47 सरकार को, CSR खर्च भी पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर

अनन्य सोच। देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शामिल रिलायंस इंडस्ट्रीज ने एक बार फिर अपनी आर्थिक ताकत और सामाजिक जिम्मेदारी का बड़ा उदाहरण पेश किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी ने सरकारी खजाने में ₹2.16 लाख करोड़ से ज्यादा का योगदान दिया है। इसमें टैक्स, ड्यूटी, लेवी और सरकार को किए गए अन्य भुगतान शामिल हैं। खास बात यह है कि रिलायंस द्वारा बनाई गई हर ₹100 की वैल्यू में से करीब ₹47 सीधे सरकारी खजाने में गए।

कंपनी के आंकड़ों के मुताबिक FY26 में रिलायंस का कुल सरकारी योगदान ₹2,16,472 करोड़ रहा, जो पिछले वित्त वर्ष के ₹2,10,269 करोड़ की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत अधिक है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद कंपनी का यह योगदान देश की अर्थव्यवस्था में उसकी मजबूत भूमिका को दर्शाता है।

रिलायंस ने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में उसका राष्ट्रीय कोष में कुल योगदान ₹15 लाख करोड़ के पार पहुंच चुका है। FY26 में कंपनी ने कुल ₹4,63,448 करोड़ की वैल्यू क्रिएट की, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा सरकार को मिला।

सिर्फ कारोबार ही नहीं, सामाजिक जिम्मेदारी निभाने में भी रिलायंस ने बड़ा कदम बढ़ाया है। कंपनी का CSR खर्च बढ़कर ₹2,248 करोड़ पहुंच गया, जो पिछले साल से 4.3 प्रतिशत अधिक है। कोविड महामारी के बाद से अब तक रिलायंस का कुल CSR खर्च ₹9,500 करोड़ से ज्यादा हो चुका है।

रिलायंस फाउंडेशन के जरिए शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, खेल और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में बड़े स्तर पर काम किए जा रहे हैं। कंपनी के अनुसार उसकी सामाजिक पहलों से अब तक देशभर में 9.7 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं।

स्कॉलरशिप प्रोग्राम के तहत हर साल 5,100 छात्रों को सहायता दी जा रही है, जबकि ग्रामीण परिवर्तन कार्यक्रम से किसानों की आय और उत्पादन में सुधार देखने को मिला है। आने वाले वर्षों में रिलायंस शिक्षा, महिलाओं और ग्रामीण आजीविका से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर और बड़ा निवेश करने की तैयारी में है।

अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आने वाले समय में देश की दूसरी बड़ी कंपनियां भी इसी तरह आर्थिक योगदान और सामाजिक जिम्मेदारी का नया मॉडल अपनाएंगी?