1 जून से शुरू होगा ‘खेत बचाओ अभियान’: हर गांव तक पहुंचेगी वैज्ञानिक खेती की सलाह, मिट्टी बचाने का राष्ट्रीय मिशन बना सरकार का लक्ष्य
कम खाद, सही खाद और सही समय पर सलाह; एक महीने तक किसानों के बीच उतरेंगी 1600 से ज्यादा टीमें
अनन्य सोच। देशभर के किसानों को संतुलित खेती, मिट्टी संरक्षण और मौसम आधारित कृषि सलाह से जोड़ने के लिए केंद्र सरकार 1 जून से 30 जून तक ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने जा रही है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे केवल जागरूकता कार्यक्रम नहीं, बल्कि खेत, किसान और गांव को जोड़ने वाला राष्ट्रीय अभियान बताया है।
दिल्ली में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसका मुख्य उद्देश्य किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन के लिए वैज्ञानिक और संतुलित उर्वरक उपयोग की जानकारी देना है। विशेष रूप से रासायनिक खादों के असंतुलित उपयोग को कम करने, मृदा परीक्षण आधारित खेती को बढ़ावा देने और जैविक व हरी खाद के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया जाएगा।
अभियान के दौरान किसानों को मौसम, मिट्टी और बाजार की स्थिति के अनुसार सीधे खेत स्तर पर सलाह दी जाएगी। उन्हें बताया जाएगा कि बदलते मौसम में कौन-सी फसलें बेहतर रहेंगी, जल संरक्षण कैसे किया जाए और जोखिम कम करने के लिए कौन से विकल्प अपनाए जाएं।
अभियान एक नजर में
प्रमुख बिंदु विवरण
अवधि 1 जून – 30 जून 2026
फोकस संतुलित उर्वरक उपयोग, मिट्टी संरक्षण
टीमें 1600+ विशेषज्ञ टीमें
विशेष जिले अधिक उर्वरक उपयोग वाले 100 जिले
भागीदारी पंचायत, KVK, ICAR, राज्य सरकारें
लाभ कृषि योजनाओं और सलाह का सीधा लाभ
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाएगा। इसके लिए राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास होगा। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम-किसान, दलहन-तिलहन मिशन, जल संरक्षण और मृदा स्वास्थ्य जैसी योजनाओं को भी इससे जोड़ा जाएगा।
सरकार का मानना है कि यदि किसान संतुलित खाद उपयोग, मौसम आधारित खेती और वैज्ञानिक सलाह को अपनाते हैं तो न केवल मिट्टी की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि खेती की लागत भी घटेगी। यही वजह है कि ‘खेत बचाओ अभियान’ को कृषि क्षेत्र में बदलाव की नई शुरुआत माना जा रहा है।