ऑस्ट्रेलिया पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों की बल्ले-बल्ले! अब नहीं लगेगी डॉक्यूमेंट्स की लाइन, DigiLocker ने बदला गेम

AAERI के साथ पार्टनरशिप में लॉन्च हुआ नया प्लेटफॉर्म, मिनटों में होगा डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, फ्रॉड का खतरा भी होगा खत्म

Aug 8, 2026 - 23:19
Aug 8, 2026 - 23:20
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ऑस्ट्रेलिया पढ़ने जाने वाले भारतीय छात्रों की बल्ले-बल्ले! अब नहीं लगेगी डॉक्यूमेंट्स की लाइन, DigiLocker ने बदला गेम

अनन्य सोच । विदेश में पढ़ाई का सपना देख रहे भारतीय स्टूडेंट्स के लिए बड़ी राहत की खबर है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत नेशनल ई-गवर्नेंस डिवीजन (NeGD) ने ऑस्ट्रेलियाई एजुकेशन रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशन (AAERI) के साथ मिलकर एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म 'AAERI Verify' लॉन्च किया है। यह प्लेटफॉर्म सीधे DigiLocker से जुड़ा हुआ है और ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटीज में एडमिशन लेने वाले छात्रों के एकेडमिक, आइडेंटिटी और फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट्स का पेपरलेस और सहमति-आधारित वेरिफिकेशन करेगा। इस प्लेटफॉर्म का अनावरण 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में हुए AAERI वार्षिक सम्मेलन में किया गया। अब तक स्टूडेंट्स को मैन्युअल पेपरवर्क में महीनों गंवाने पड़ते थे, लेकिन अब यह प्रोसेस दो आसान चरणों में पूरी हो सकेगी। पहला चरण स्टूडेंट वेरिफिकेशन का है, जो यूनिवर्सिटी एप्लीकेशन शुरू होने से पहले ही पूरा हो जाएगा। दूसरा चरण स्पॉन्सर चेक का है, जो एडमिशन ऑफर मिलते ही फाइनेंशियल ऑथेंटिसिटी वेरिफाई करने के लिए शुरू होगा। छात्र की सहमति मिलते ही DigiLocker सीधे मूल जारीकर्ता संस्थानों से डिजिटल हस्ताक्षरित रिकॉर्ड ऑस्ट्रेलियाई यूनिवर्सिटीज तक पहुंचाएगा, जिससे फ्रॉड का खतरा पूरी तरह खत्म हो जाएगा। NeGD के डायरेक्टर जेएल गुप्ता ने इस पहल को भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह पार्टनरशिप ग्लोबल एजुकेशन सिस्टम में भारत की डिजिटल ताकत को साबित करती है। बता दें कि DigiLocker फिलहाल 72 करोड़ से ज्यादा रजिस्टर्ड यूजर्स को सर्विस दे रहा है और यूपीएससी, विदेश मंत्रालय जैसे कई सरकारी विभागों से जुड़ा हुआ है। क्या यह नई पहल भारतीय छात्रों के लिए विदेश पढ़ाई का रास्ता और आसान बना देगी? आने वाले महीनों में इसका असर साफ दिखने की उम्मीद है।