विदेश में छिपे 274 भगोड़े पकड़े गए! सैटेलाइट और डिजिटल फुटप्रिंट से यूं हुआ पर्दाफाश

नाम बदला, पहचान बदली, फिर भी नहीं बच पाए भगोड़े अपराधी — जानिए कैसे मोदी सरकार ने बनाया ऐसा सिस्टम जिससे दुनिया में कहीं भी छिपना हुआ नामुमकिन

Aug 4, 2026 - 23:11
Aug 4, 2026 - 23:18
 0
विदेश में छिपे 274 भगोड़े पकड़े गए! सैटेलाइट और डिजिटल फुटप्रिंट से यूं हुआ पर्दाफाश

अनन्य सोच। क्या आप जानते हैं कि विदेश भागकर अपनी पहचान तक बदल चुके अपराधी भी अब भारतीय एजेंसियों की पकड़ से नहीं बच पा रहे? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में वर्ष 2019 से 2026 तक 36 देशों से कुल 274 Fugitive Criminals को भारत वापस लाया गया है — और इसके पीछे की कहानी किसी थ्रिलर से कम नहीं है।

दरअसल 2014 से पहले हालात बिल्कुल अलग थे। उस दौर में Extradition Laws पुराने पड़ चुके थे और भारत का सिर्फ 37 देशों के साथ ही प्रत्यर्पण समझौता था। स्थिति इतनी खराब थी कि 2004 से 2013 के बीच एक साल में औसतन सिर्फ 4 भगोड़ों को ही वापस लाया जा सका, जबकि 110 अनुरोध लंबित पड़े रहते थे। अधूरे दस्तावेज, धीमी कार्यवाही और Double Jeopardy जैसी कानूनी अड़चनों ने इस प्रक्रिया को और उलझा दिया था।

लेकिन मोदी सरकार ने इस मुद्दे को 'राष्ट्रीय प्राथमिकता' बनाकर पूरी रणनीति ही बदल दी। गृह मंत्री अमित शाह ने Global Operations, Strong Coordination और Smart Diplomacy — इन तीन स्तंभों पर काम शुरू किया। 2019 में NIA Amendment Act और UAPA Amendment Act लाए गए, वहीं 2024 में तीन नए Criminal Laws लागू हुए, जिनमें पहली बार BNSS की धारा 355 और 356 के तहत 'Trial in Absentia' का प्रावधान जोड़ा गया — यानी अब भगोड़े की गैरमौजूदगी में भी पूरा ट्रायल पूरा हो सकता है।

सबसे दिलचस्प पहलू है जनवरी 2025 में लॉन्च हुआ 'BHARATPOL', जिसने CBI, राज्य पुलिस और जिला पुलिस मुख्यालयों को Interpol से जोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि पहले जो सूचना साझा करने में हफ्तों लगते थे, अब वह सिर्फ 3 से 10 दिन में मिल जाती है। इसके साथ ही 1,400 से अधिक यूनिट ऑफिस इस नेटवर्क से जुड़ चुके हैं।

और फिर आता है सबसे रोमांचक हिस्सा — 'Operation Trishul'। इसके तहत विदेश में नाम और पहचान बदलकर छिपे भगोड़ों को खोजने के लिए Satellite Surveillance और Digital Footprint Tracking का इस्तेमाल किया गया। प्रोफाइल-मैपिंग की मदद से वो अपराधी भी पकड़े गए, जिन्होंने सोचा था कि वे हमेशा के लिए गुम हो चुके हैं।

आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं। Interpol Red Corner Notice की संख्या 2022 में सिर्फ 40 थी, जो 2026 में बढ़कर 182 तक पहुंच गई। पिछले तीन वर्षों में कुल 401 भगोड़ों के खिलाफ नोटिस जारी हुए। इतना ही नहीं, PMLA के सख्त इस्तेमाल से 2019 से 2026 तक भगोड़ों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई, जबकि ₹18,762 करोड़ की सफल वसूली भी हुई।

तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण इस पूरी मुहिम की सबसे बड़ी मिसाल मानी जा रही है। IB, CBI, R&AW, NIA और ED जैसी एजेंसियां अब मिलकर एक "Whole of Government" मॉडल पर काम कर रही हैं, जिसने भारत की सुरक्षा रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है।