सलमान खान केस में सख्त रुख: टास्क फोर्स के आदेश, हाईकोर्ट के बड़े फैसले और अफसरों को चेतावनी
Ananya soch: Rajasthan High Court
अनन्य सोच। Legal Update India: (Court Orders) राजस्थान में न्यायपालिका ने एक के बाद एक अहम फैसलों से कानून के सख्त पालन का संदेश दिया है। जहां एक ओर Salman Khan के खिलाफ जमानती वारंट की तामील के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने के आदेश दिए गए हैं, वहीं Rajasthan High Court ने भी दो अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण निर्णय सुनाए हैं।सलमान खान मामले में टास्क फोर्स के निर्देश
(Consumer Commission Jaipur) जिला उपभोक्ता आयोग-2 ने राजश्री पान मसाला के भ्रामक विज्ञापन से जुड़े मामले में पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया है कि (Consumer Rights) वह विशेष टास्क फोर्स बनाकर मुंबई जाकर सलमान खान पर तीसरे जमानती वारंट की तामील सुनिश्चित करे।(Salman Khan Case) आयोग ने स्पष्ट कहा कि सेलिब्रिटी होना कानून से ऊपर होने का अधिकार नहीं देता।
आयोग ने चेतावनी दी कि यदि 6 अप्रैल की अगली सुनवाई पर अभिनेता और कंपनी निदेशक उपस्थित नहीं हुए, तो उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा। यह मामला उपभोक्ता योगेन्द्र सिंह की शिकायत पर दर्ज हुआ, जिसमें उत्पाद को ‘केसर युक्त’ बताकर गुमराह करने का आरोप लगाया गया है।
हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ‘मृत व्यक्ति को मारने का प्रयास असंभव’
दूसरे अहम मामले में हाईकोर्ट ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें मृत व्यक्ति के अंग निकालने के मामले में आईपीसी की धारा 308 (हत्या का प्रयास) लगाई गई थी। जस्टिस Anup Kumar Dhand की एकलपीठ ने कहा कि यह कानूनी रूप से असंभव है, क्योंकि यह धारा केवल जीवित व्यक्ति पर लागू होती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अंग निकालना यदि अपराध है तो उसकी शिकायत केवल अधिकृत प्राधिकारी ही कर सकता है, जबकि इस मामले में ऐसा कोई प्रमाण या शिकायत मौजूद नहीं थी।
गोल्फ क्लब निर्माण पर सख्ती, अफसरों को नोटिस
(Legal News India) हाईकोर्ट की खंडपीठ ने जयपुर में गोल्फ क्लब के पास हो रहे निर्माण कार्य पर यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। साथ ही मुख्य सचिव और यूडीएच सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे तीन सप्ताह में जवाब पेश करें, अन्यथा 23 अप्रैल को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित हों।
(Legal Update India) इन सभी मामलों में अदालतों ने साफ कर दिया है कि कानून के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या विशेषाधिकार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। न्यायपालिका के इन सख्त रुख से पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूती मिल रही है।