जब ‘पेड़ों’ ने छेड़ी इंसानों के खिलाफ मुहिम! नुक्कड़ नाटक ने दिखाया भविष्य का डरावना सच, पर्यावरण बचाने का दिया बड़ा संदेश
सागर। विश्व पर्यावरण दिवस पर बहरोड़, नीमराना और कोटपूतली में गूंजा Environmental Awareness Campaign, कलाकारों ने Global Warming और Pollution पर जगाई चेतना
अनन्य सोच। बढ़ते तापमान, बिगड़ते मौसम और तेजी से बढ़ रहे Pollution के बीच विश्व पर्यावरण दिवस पर एक अनोखा दृश्य देखने को मिला। बहरोड़, नीमराना और कोटपूतली के विभिन्न स्थानों पर आयोजित Nukkad Natak ने लोगों को पर्यावरण संरक्षण का ऐसा संदेश दिया, जिसने हर किसी को सोचने पर मजबूर कर दिया। नाटक में पेड़-पौधों को इंसानों के खिलाफ आंदोलन करते हुए दिखाया गया, जिससे प्रकृति के महत्व और उसके संरक्षण की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया।
Greenlam Industries के सहयोग और कला सागर सेवा संस्था के तत्वावधान में आयोजित इस जन-जागरूकता अभियान के दौरान कलाकारों ने Global Warming, Climate Change, बढ़ते Pollution और लगातार घटते हरित क्षेत्र जैसे गंभीर विषयों को मंचन के माध्यम से जीवंत कर दिया। नाटक का संदेश साफ था कि यदि आज पर्यावरण को बचाने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है।
संस्था सचिव स्वराला किरार ने बताया कि वर्तमान समय में हवा और पानी दोनों तेजी से प्रदूषित हो रहे हैं, जिसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य और जीवनशैली पर पड़ रहा है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक Plantation करने और पर्यावरण संरक्षण को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की।
1 जून से 5 जून तक चले इस Environmental Awareness Campaign के तहत विभिन्न स्थानों पर लगातार नुक्कड़ नाटकों का मंचन किया गया। स्थानीय नागरिकों ने इन प्रस्तुतियों को सराहा और कलाकारों के संदेश को समय की जरूरत बताया।
इस अवसर पर कलाकार नितेश वर्मा, दीपक शर्मा, विक्रम बॉन्ड, स्वराला किरार, दीक्षित और राजकुमार ने प्रभावशाली अभिनय कर दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। कार्यक्रम में प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी राजकुमार सेहरा, Greenlam Industries के अधिकारी संदीप अग्रवाल सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।
पर्यावरण दिवस पर दिया गया यह संदेश लोगों को याद दिला गया कि प्रकृति की रक्षा केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाले कल को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी भी है।