सावन का पावन सफर शुरू: 3 को पहला सोमवार, 15 को हरियाली तीज और 28 अगस्त को रक्षाबंधन की रौनक
श्रावण मास 2026 इस बार धार्मिक आस्था, व्रत-उत्सव और मंदिरों में विशेष आयोजनों के साथ बेहद खास रहने वाला है। 3 अगस्त को पहले सावन सोमवार से शुरू होने वाला यह आध्यात्मिक सफर 28 अगस्त को रक्षाबंधन तक भक्तिमय माहौल बनाए रखेगा। शिवालयों से लेकर प्रमुख मंदिरों तक पूरे महीने श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
श्रावण मास 2026: पूरे अगस्त में गूंजेगी भक्ति, व्रत और उत्सव की धूम
अनन्य सोच। श्रावण मास भगवान शिव की आराधना का सबसे पवित्र समय माना जाता है और वर्ष 2026 में इसकी शुरुआत पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ होने जा रही है। इस बार सावन के पहले सोमवार का व्रत 3 अगस्त को रखा जाएगा। इसके साथ ही मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, रुद्राभिषेक, जलाभिषेक और भजन-कीर्तन का दौर शुरू हो जाएगा।
श्रावण के दौरान चारों सोमवार विशेष महत्व रखते हैं। पहले सोमवार से ही शिव भक्त सुबह से मंदिरों में पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। कई स्थानों पर धार्मिक यात्राएं, कथा, यज्ञ और भंडारों का आयोजन भी किया जाएगा। श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करेंगे तथा परिवार की सुख-समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करेंगे।
महीने का दूसरा बड़ा आकर्षण 15 अगस्त को हरियाली तीज रहेगा। महिलाओं के लिए यह पर्व विशेष महत्व रखता है। सुहागिन महिलाएं व्रत रखेंगी, पारंपरिक परिधान पहनेंगी, झूले झूलेंगी और शिव-पार्वती की पूजा करेंगी। शहरों में तीज महोत्सव, सांस्कृतिक कार्यक्रम और लोकगीतों की प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी।
श्रावण के दौरान धार्मिक आयोजनों की भी लंबी श्रृंखला रहेगी। विभिन्न मंदिरों में भागवत कथा, शिव महापुराण, संत प्रवचन, भजन संध्या और सामूहिक रुद्राभिषेक जैसे कार्यक्रम होंगे। कई स्थानों पर आध्यात्मिक यात्राएं और विशाल भंडारों का आयोजन भी श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगा।
18 अगस्त को कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन प्रस्तावित है। वहीं 28 अगस्त को भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाएगा। बाजारों में राखियों, मिठाइयों, उपहारों और पारंपरिक परिधानों की खरीदारी चरम पर रहने की संभावना है।
श्रावण मास केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दौरान लोग सात्विक जीवनशैली अपनाते हैं, दान-पुण्य करते हैं और आध्यात्मिक गतिविधियों में बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। मंदिरों में सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, श्रावण में भगवान शिव की आराधना, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, रुद्राभिषेक और बिल्वपत्र अर्पित करने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस महीने की गई पूजा-अर्चना से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है।
कुल मिलाकर अगस्त 2026 का श्रावण मास श्रद्धा, भक्ति, परंपरा और उत्सव का अद्भुत संगम लेकर आया है। सावन सोमवार, हरियाली तीज और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख पर्व पूरे महीने को भक्तिमय रंग में रंग देंगे और धार्मिक आयोजनों से मंदिरों में विशेष रौनक देखने को मिलेगी।