लखनऊ बनेगा डेटा डिप्लोमेसी का केंद्र! भारत की अध्यक्षता में जुटेंगे ब्रिक्स देशों के टॉप सांख्यिकीविद्
आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं होते, बल्कि किसी देश के विकास की सच्ची तस्वीर होते हैं। यही सोच लेकर अब भारत ब्रिक्स देशों के सांख्यिकी प्रमुखों को लखनऊ में एक मंच पर लाने जा रहा है। जानिए इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक में क्या-क्या होगा खास...
अनन्य सोच। ब्रिक्स देशों (BRICS Countries) के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालयों (National Statistical Offices - NSO) के प्रमुखों की महत्वपूर्ण बैठक भारत की अध्यक्षता (India's Presidency) में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित होने जा रही है। यह बैठक 3 से 4 अगस्त 2026 तक चलेगी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब और यूएई (UAE) जैसे सदस्य देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
वर्ष 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता का व्यापक विषय है "सुदृढ़शीलता, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण।" इसी क्रम में सांख्यिकी ट्रैक (Statistics Track) के अंतर्गत भारत ने "परिवर्तन के प्रेरक के रूप में गुणवत्तापूर्ण सांख्यिकी" थीम अपनाई है, जो डेटा क्वालिटी (Data Quality), इनोवेशन और जन-केंद्रित सांख्यिकीय प्रणालियों के प्रति भारत की गंभीर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
गौरतलब है कि वर्ष 2010 से ब्रिक्स देश संयुक्त सांख्यिकी प्रकाशन (Joint Statistical Publication - JSP) और वर्ष 2020 से स्नैपशॉट ब्रिक्स जेएसपी प्रकाशित करते आ रहे हैं। इससे पहले 16-17 अप्रैल 2026 को एनएसओ की तकनीकी बैठक (Technical Meeting) हो चुकी है, जिसमें जेएसपी 2026 के लिए साझा रूपरेखा तैयार की गई थी।
इस प्रमुख बैठक का उद्देश्य ब्रिक्स के मुख्य सांख्यिकीय उत्पादों को मजबूत बनाना, राष्ट्रीय सांख्यिकी प्रणालियों में नवाचार लाना, डेटा प्रसार (Data Dissemination) को बेहतर बनाना और व्यापक आर्थिक व क्षेत्रीय सांख्यिकी को सुदृढ़ करना है। बैठक में नीति निर्माता, शिक्षाविद, थिंक टैंक और तकनीकी विशेषज्ञ भी हिस्सा लेंगे।
इसके साथ ही दो विशेष आधे दिन के सह-कार्यक्रम भी आयोजित होंगे — 3 अगस्त को "प्रशासनिक डेटा की क्षमता को उजागर करना" और 4 अगस्त को "विकसित होते डेटा पारिस्थितिकी तंत्र में एआई (AI) की तैयारी" विषय पर चर्चा होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन न केवल भारत की वैश्विक सांख्यिकीय साख को मजबूत करेगा, बल्कि लखनऊ को अंतरराष्ट्रीय डेटा कूटनीति के नक्शे पर भी नई पहचान देगा।