गांवों में सफाई टैक्स को लेकर अशोक गहलोत ने उठाए सवाल, संजीवनी घोटाले पर की बड़ी पेशकश
प्रदेश में गांवों में प्रस्तावित सफाई टैक्स और संजीवनी घोटाले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बातचीत में अपनी राय रखी। उन्होंने जहां नई टैक्स व्यवस्था पर सवाल उठाए, वहीं संजीवनी मामले में सरकार के साथ मिलकर काम करने की पेशकश भी दोहराई। जानिए उन्होंने इन दोनों मुद्दों पर क्या कुछ कहा...
अनन्य सोच। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Former CM Ashok Gehlot) ने एक विशेष बातचीत में राज्य सरकार द्वारा गांवों में सफाई व्यवस्था के नाम पर प्रस्तावित तीन सौ रुपये टैक्स (Village Cleanliness Tax) को लेकर अपनी बात रखी। इस सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार के फैसलों की जानकारी उन्हें पूरी तरह नहीं है और यह स्पष्ट नहीं है कि इस तरह के निर्णयों के पीछे किस स्तर पर सलाह-मशविरा किया जा रहा है। उन्होंने इस विषय पर पारदर्शिता (Transparency) बरतने की जरूरत बताई, ताकि आमजन को इस टैक्स को लेकर स्पष्ट जानकारी मिल सके।
गांव के विकास (Village Development) के मुद्दे पर उन्होंने याद दिलाया कि कांग्रेस पार्टी (Congress Party) के कार्यकाल में ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को प्राथमिकता दी गई थी। उनका कहना था कि किसी भी नई टैक्स व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके प्रभावों पर विस्तार से विचार होना चाहिए, ताकि ग्रामीणों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
बातचीत के दौरान चर्चित आदर्श घोटाले (Adarsh Scam) का जिक्र आने पर गहलोत ने इसे याद करते हुए वर्तमान में सुर्खियों में रहे संजीवनी घोटाले (Sanjeevani Scam) का उल्लेख किया। इस पर उन्होंने एक सकारात्मक और सहयोगात्मक रुख अपनाते हुए कहा कि वे कई बार संबंधित मंत्री को आपसी बातचीत के लिए प्रस्ताव दे चुके हैं। उनका कहना था कि यदि मंत्री जी पर लगे आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है, तो दोनों पक्षों को मिलकर इस मामले में पीड़ितों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने इस सहयोग के प्रस्ताव को एक बार फिर दोहराते हुए कहा कि वे इसके लिए हमेशा तैयार हैं।
गहलोत ने यह भी बताया कि हाल ही में अखबार में पढ़ी खबर के अनुसार, संजीवनी घोटाले को लेकर सरकार की ओर से कुछ हलचल देखने को मिली है। उन्होंने इसे सकारात्मक संकेत बताते हुए उम्मीद जताई कि इससे पीड़ित निवेशकों (Investors) को जल्द राहत मिल सकेगी। उनका कहना था कि यदि प्रशासनिक स्तर पर मामले की गंभीरता से जांच आगे बढ़ती है, तो यह प्रभावित लोगों के लिए राहत भरी खबर होगी।
गहलोत की यह टिप्पणियां ऐसे समय पर आई हैं जब प्रदेश में विभिन्न प्रशासनिक और आर्थिक मुद्दों पर लगातार चर्चा हो रही है। उनका यह रुख दर्शाता है कि वे कुछ मुद्दों पर आलोचनात्मक टिप्पणी करने के बजाय समाधान-उन्मुख (Solution-Oriented) दृष्टिकोण अपनाने की बात कर रहे हैं, विशेष रूप से संजीवनी जैसे मामलों में जहां आम जनता का हित सीधे तौर पर जुड़ा हुआ है।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार गांवों में प्रस्तावित सफाई टैक्स को लेकर क्या रुख अपनाती है और संजीवनी घोटाले में गहलोत के सहयोग के प्रस्ताव पर मंत्री जी की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है।