Zojila Tunnel: 6,808 करोड़ की परियोजना जुड़ाव के चरण में, सोनमर्ग-मीनामर्ग सफर 2 घंटे से घटकर 30 मिनट होने की उम्मीद
Zojila Tunnel की मुख्य खुदाई जून 2026 में जुड़ने के चरण तक पहुँची। जानिए लागत, safety सिस्टम और सोनमर्ग-मीनामर्ग यात्रा समय में कमी की पूरी जानकारी।
अनन्य सोच । जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच All-Weather Connectivity की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। राष्ट्रीय राजमार्ग-1 पर बालटाल और मीनामर्ग के बीच बन रही Zojila Tunnel की मुख्य सुरंग की खुदाई जून 2026 में दोनों छोरों से आगे बढ़ते हुए आपस में जुड़ने के चरण तक पहुँच गई। परियोजना का निर्माण एनएचआईडीसीएल (NHIDCL) द्वारा किया जा रहा है।
परियोजना एक नज़र में
13.153 किलोमीटर लंबी यह द्विदिशीय सुरंग समुद्र तल से 2,900 से 3,310 मीटर की ऊँचाई पर बन रही है। इसकी कुल लागत 6,808 करोड़ रुपये है और निर्माण अक्टूबर 2020 में शुरू हुआ था। उद्देश्य जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बीच साल भर निर्बाध सड़क संपर्क देना है। परियोजना में 4.8 किलोमीटर की दो जुड़वाँ एकदिशीय नीलग्रार सुरंगें, कुल 2.350 किलोमीटर के आठ cut-and-cover खंड, कुल 810 मीटर के चार पुल और 40 पुलियाएँ भी शामिल हैं।
Safety और Technology पर ज़ोर
सुरंग में आधुनिक Ventilation System, Automatic Fire Detection System, CCTV निगरानी, Variable Message Sign (VMS) और SCADA सिस्टम लगाए जाएँगे। इसके साथ अन्य उन्नत सुरक्षा और Traffic Management व्यवस्थाएँ भी होंगी। 16.964 किलोमीटर लंबी पहुँच सड़क पर Avalanche यानी हिमस्खलन से बचाव के लिए snow tunnels, catch dams, deflector dams और air-blast walls बनाई जा रही हैं।
यात्रा समय में बड़ी कटौती
परियोजना पूरी होने पर सोनमर्ग से मीनामर्ग के बीच यात्रा का समय लगभग दो घंटे से घटकर करीब 30 मिनट रहने की उम्मीद है। सर्दियों में ज़ोजिला दर्रे पर भारी बर्फबारी और हिमस्खलन का खतरा रहता है। सुरंग बनने से दुर्घटनाओं और आवागमन में बाधा का जोखिम घटेगा।
Tourism, Trade और Strategic महत्व
सुरंग से पर्यटन और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा, साथ ही दूरदराज और सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुँच आसान होगी। साल भर सड़क संपर्क बना रहने से रक्षा रसद (Defence Logistics) और सामरिक तैयारियों को भी मजबूती मिलेगी। परियोजना से रोजगार के नए अवसर बनेंगे, आर्थिक विकास को गति मिलेगी और स्थानीय समुदायों की आजीविका व जीवन की गुणवत्ता में सुधार आएगा।
पहले से चालू मिसाल: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग
इस क्षेत्र में पहले से चालू डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग (पूर्व में चेनानी-नाशरी सुरंग) 2017 में शुरू हुई थी। 9 किलोमीटर लंबी यह सुरंग उधमपुर को रामबन से जोड़ती है। इसे भारत की सबसे लंबी परिचालनाधीन राजमार्ग सुरंगों में गिना जाता है और यह एशिया की सबसे लंबी द्विदिशीय सुरंगों में शामिल है। 2,500 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस सुरंग ने दूरी 31 किलोमीटर और यात्रा समय दो घंटे घटाया है, जिससे ईंधन की लागत भी कम हुई है।