श्रीनगर में बड़ा सहकारिता सम्मेलन! 'सहकार से समृद्धि' के विजन को जमीन पर उतारने की तैयारी, PACS से लेकर डिजिटल बैंकिंग तक बड़े फैसले

जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में आयोजित सहकारिता क्षेत्र के 8वें राष्ट्रीय सम्मेलन में देशभर के सहकारी आंदोलन की दिशा तय करने वाली बड़ी चर्चा हुई। सहकारिता मंत्रालय के सचिव ने सहकारी संस्थाओं को लेकर कई अहम घोषणाएं की हैं। आखिर इस सम्मेलन में क्या-क्या बड़े फैसले लिए गए और आगामी 6 महीनों के लिए क्या रणनीति बनी, जानिए पूरी रिपोर्ट में।

Jun 25, 2026 - 17:51
Jun 25, 2026 - 17:51
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श्रीनगर में बड़ा सहकारिता सम्मेलन! 'सहकार से समृद्धि' के विजन को जमीन पर उतारने की तैयारी, PACS से लेकर डिजिटल बैंकिंग तक बड़े फैसले

अनन्य सोच। 'सहकार से समृद्धि — विजन से जमीनी वास्तविकता तक' विषय पर आयोजित 8वें National Conference में भारत के Cooperative Sector के भविष्य के विजन और रोडमैप पर विचार-विमर्श हुआ। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'सहकार से समृद्धि' विजन और केंद्रीय मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में सम्मेलन का फोकस पिछले पांच वर्षों की पहलों को जमीनी परिणामों में बदलने पर रहा।

सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि अब समय आ गया है कि संख्या से आगे बढ़कर सहकारी संस्थाओं में Quality, Accountability और Professional Management पर ध्यान केंद्रित किया जाए। उन्होंने कहा कि UPI और Digital Financial Services के दौर में Cooperative Banks को प्रासंगिक बने रहने के लिए आधुनिक Technology Platforms अपनाने होंगे।

डॉ. भूटानी ने Dairy, Compressed Biogas और Sugar Industry के By-Products जैसे क्षेत्रों में Sustainability और Circularity पहलों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि National Cooperative Database 2.0 से Data-Driven Governance मजबूत होगी और सहकारी संस्थाएं सीधे डेटा अपडेट कर सकेंगी।

उन्होंने राज्यों से दुनिया की सबसे बड़ी Grain Storage Scheme के तहत Infrastructure मजबूत करने और फसल कटाई के बाद होने वाली क्षति कम करने को कहा। साथ ही अपूर्ण पंचायतों में नए Multipurpose PACS, Dairy और Fisheries Cooperatives के गठन में तेजी लाने का आग्रह किया गया।

सम्मेलन में राज्यों ने अपनी सफल Best Practices और Innovation साझा किए। NABARD, NDDB, IFFCO, KRIBHCO, NAFED, NCCF और NCDC जैसी राष्ट्रीय संस्थाओं ने भी अपने अनुभव साझा किए। NCEL, NCOL और BBSSL जैसी नई पीढ़ी की संस्थाओं के माध्यम से National Value Chains बनाने पर भी जोर दिया गया।

सम्मेलन में आगामी छह महीनों के लक्ष्यों के लिए Actionable Points तय किए गए, जिससे देशभर में सहकारी आंदोलन को नई मजबूती मिलेगी।