रवींद्र मंच पर ‘जामुन का पेड़’ का धमाका: हंसी, व्यंग और इमोशन का ऐसा कॉम्बो कि दर्शक बोले—वाह!
Ananya soch: Jaipur Theatre News
अनन्य सोच। World Theatre Day: विश्व रंगमंच दिवस के खास मौके पर (Ravindra Manch Event) रवींद्र मंच रंगों, भावनाओं और शानदार प्रस्तुतियों से जीवंत हो उठा, जहां (IPTA Festival Jaipur) तीन दिवसीय इप्टा राष्ट्रीय नाट्य रंगोत्सव का जोरदार आगाज हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट के संदेश से हुई, जिसे अमेरिकी अभिनेता विलेम डैफो के विचारों के रूप में वरिष्ठ रंगकर्मी ज़फ़र खान ने प्रस्तुत किया। संदेश में रंगमंच की निरंतरता और दर्शकों की उपस्थिति को उसकी आत्मा बताया गया।
‘जामुन का पेड़’: हंसी में छिपा गहरा कटाक्ष
रंगशिल्प नाट्य संस्था की प्रस्तुति (Jamun Ka Ped Play) ‘जामुन का पेड़’ ने दर्शकों को शुरुआत से अंत तक बांधे रखा। कृष्णचंद्र की प्रसिद्ध कहानी पर आधारित यह नाटक व्यंग, हास्य और संवेदना का जबरदस्त मिश्रण है।
कहानी में एक आम आदमी जामुन के पेड़ के नीचे दब जाता है, लेकिन उसे बचाने के बजाय लोग जिम्मेदारी टालते रहते हैं। फाइलें चलती रहती हैं, बहाने बनते रहते हैं और समय निकलता जाता है। अंत में जब समाधान आता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। यह प्रस्तुति दर्शकों को हंसाते-हंसाते अंदर तक झकझोर देती है।
मंचन में दिखी गहराई और प्रतीकात्मकता
नाटक में मंच को एक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया गया—एक ऐसा पेड़, जो धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है। टूटती दीवारें, टपकती छत और अव्यवस्था को दृश्यात्मक रूप में दिखाकर कलाकारों ने भावनात्मक जुड़ाव पैदा किया।
कलाकारों ने बिखेरा जादू
मंच पर अशोक माहेश्वरी, जितेंद्र शर्मा, राजेंद्र शर्मा ‘राजू’, नीरज गोस्वामी, ईश्वर दत्त माथुर, मोइनुद्दीन खान, आलोक चतुर्वेदी, धनराज धाधीच, दीपक कथूरिया, यादवेंद्र यादव, लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’, कवितेश, श्रेया व्यास, मिहिजा और निर्देशक-गायक गुरमिंदर सिंह पुरी ‘रोमी’ ने शानदार अभिनय से तालियां बटोरीं।
मंच पार्श्व में गुलजार हुसैन (वायलिन), अनिल मारवाड़ी (लाइट्स), मनोज स्वामी (साउंड) और अंकित शर्मा ‘नोनू’ (मंच सज्जा) का योगदान भी काबिल-ए-तारीफ रहा।
‘जामुन का पेड़’ सिर्फ एक नाटक नहीं, बल्कि हंसी के साथ सोचने पर मजबूर करने वाला अनुभव है, जो दर्शकों के दिल में देर तक बस जाता है।