Kaifi Azmi की Shayari में प्रेम, बगावत और इंसानियत: Jaipur में 'ज़िंदा ख़्वाब के शाइर' Book Discussion
Jaipur के Ashok Club में Prabha Khaitan Foundation की 'सहयोग' पहल के तहत Kaifi Azmi पर Book Discussion हुई। Vinod Bharadwaj की किताब 'ज़िंदा ख़्वाब के शाइर' का Launch भी हुआ। पढ़ें पूरी खबर।
अनन्य सोच । प्रख्यात उर्दू शायर Kaifi Azmi की साहित्यिक विरासत, सामाजिक प्रतिबद्धता और हिंदी सिनेमा में योगदान पर शुक्रवार को अशोक क्लब में Book Discussion हुई। Prabha Khaitan Foundation की 'सहयोग' पहल के तहत आयोजित कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार, लेखक और संपादक Vinod Bharadwaj ने अपनी संपादित पुस्तक 'ज़िंदा ख़्वाब के शाइर: कैफ़ी आज़मी' पर लेखक व पत्रकार Anshu Harsh के साथ संवाद किया। पुस्तक का औपचारिक Launch तुषारिका सिंह, अंशु हर्ष, विनोद भारद्वाज और जगदीप सिंह ने किया।
Shayari में Love, Revolt और Humanity
चर्चा में कैफ़ी की शायरी में प्रेम, बगावत और इंसानियत के भावों के साथ उनके Progressive विचारों और सामाजिक सरोकारों पर बात हुई। भारद्वाज ने कहा कि कैफ़ी के लिए साहित्य सिर्फ़ भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि समाज में बदलाव का माध्यम था। Progressive Writers' Movement और IPTA से उनका जुड़ाव इसी प्रतिबद्धता का प्रमाण था।
सादगी और संघर्ष की शख्सियत
भारद्वाज ने बताया कि जमींदार परिवार से होने के बावजूद कैफ़ी ने सादगी नहीं छोड़ी और हमेशा मज़दूरों, किसानों और मेहनतकश लोगों के हक में आवाज उठाई। उनके मानवीय पक्ष पर चर्चा करते हुए पत्नी शौकत आज़मी के संस्मरणों का भी जिक्र हुआ। भारद्वाज ने कहा कि कैफ़ी ने जीवन में कभी उम्मीद नहीं छोड़ी और हर हाल में खुश रहना जानते थे।
Writing बनाम Editing
लेखन और संपादन के अंतर पर भारद्वाज ने कहा कि लेखन में रचनात्मक स्वतंत्रता होती है, जबकि संपादन में सुधार और चयन की गुंजाइश तो होती है, पर मूल रचना को मनचाहे ढंग से बदलने की आज़ादी नहीं होती। कार्यक्रम का समापन Q&A Session से हुआ। स्वागत संबोधन जगदीप सिंह ने दिया और धन्यवाद ज्ञापन तुषारिका सिंह ने किया।