राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: तबादले पर रोक, फर्जी डिग्री केस में जमानत खारिज और सफाई मामले में अधिकारी तलब
मानवीय संवेदना, कानून की सख्ती और प्रशासनिक जवाबदेही—तीनों मामलों में हाईकोर्ट के अहम आदेश
अनन्य सोच। राजस्थान हाईकोर्ट ने गुरुवार को तीन अलग-अलग मामलों में महत्वपूर्ण फैसले सुनाते हुए प्रशासन और संबंधित पक्षों को स्पष्ट संदेश दिया है कि न्याय, संवेदनशीलता और जवाबदेही से कोई समझौता नहीं होगा।
कैंसर पीड़ित पत्नी के कारण तबादले पर रोक
हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें एक्टिंग मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस संजित पुरोहित शामिल थे, ने एक स्कूल व्याख्याता के तबादले पर रोक लगा दी। याचिकाकर्ता गोपाल सिंह ने बताया कि उनकी पत्नी ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित हैं और उदयपुर में इलाजरत हैं। ऐसे में राजसमंद तबादला होने से इलाज प्रभावित होता। अदालत ने शिक्षा सचिव और माध्यमिक शिक्षा निदेशक से जवाब मांगा और याचिकाकर्ता को पूर्व पद का वेतन देने के निर्देश दिए।
फर्जी डिग्री मामले में जमानत से इनकार
एक अन्य मामले में जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर ने ओपीजेएस विश्वविद्यालय के चेयरमैन जोगेंद्र सिंह की चौथी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि इससे पहले तीन बार जमानत याचिका खारिज हो चुकी है और कोई नया आधार प्रस्तुत नहीं किया गया है।
सरकार की ओर से बताया गया कि फर्जी डिग्रियों के आधार पर भर्ती में चयन हुआ और सत्यापन रिपोर्ट भी जारी की गई, जिससे आरोपी की संलिप्तता स्पष्ट होती है।
सफाई व्यवस्था पर हाईकोर्ट सख्त
तीसरे मामले में हाईकोर्ट की खंडपीठ, जिसमें जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस अशोक कुमार जैन शामिल थे, ने नगर निगम के मालवीय नगर जोन उपायुक्त को 28 अप्रैल को पेश होने के आदेश दिए।
याचिकाकर्ता अधिवक्ता विमल चौधरी ने अपने क्षेत्र में गंदगी के कारण बीमार होने की शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि पूर्व में दिए गए सफाई संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं हो रहा और कई बार शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं हुई।
न्याय और जिम्मेदारी का संदेश
इन तीनों मामलों में हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जहां मानवीय संवेदनाएं महत्वपूर्ण हैं, वहीं कानून की सख्ती और प्रशासनिक जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।