राजस्थान में Project Raptor की शुरुआत: गिद्धों और शिकारी पक्षियों के Vulture Conservation के लिए वन विभाग व WII साथ आए

जयपुर में राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने Project Raptor पर मंथन किया। Scientific Research और Monitoring से गिद्ध संरक्षण को मिलेगी मजबूती।

Oct 24, 2026 - 17:29
Oct 24, 2026 - 18:47
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राजस्थान में Project Raptor की शुरुआत: गिद्धों और शिकारी पक्षियों के Vulture Conservation के लिए वन विभाग व WII साथ आए

अनन्य सोच । राजस्थान में गिद्धों और अन्य शिकारी पक्षियों (Raptors) के संरक्षण को प्रभावी बनाने के लिए राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने संयुक्त रूप से 'प्रोजेक्ट रैप्टर' पर कार्यक्रम आयोजित किया। वन विभाग की मेजबानी में हुए इस आयोजन में वरिष्ठ वन अधिकारियों, वन्यजीव विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और संरक्षण संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। परियोजना के उद्देश्यों, प्रस्तावित गतिविधियों और राज्य में संरक्षण की प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।

Scientific Study से मजबूत होगी संरक्षण रणनीति

WII के वैज्ञानिक-सी डॉ. आर. सुरेश कुमार और उनकी टीम ने परियोजना के उद्देश्य, गतिविधियां और अपेक्षित परिणाम प्रस्तुत किए। प्रस्तुति में पक्षियों की आबादी (Population Assessment) का व्यवस्थित आकलन, उनके आवागमन (Movement Pattern), आवास उपयोग और अलग-अलग आबादियों के बीच संपर्क के अध्ययन की आवश्यकता बताई गई। इन अध्ययनों को वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित संरक्षण योजनाओं के लिए अहम माना गया।

विशेषज्ञों ने रखे विचार

विशेष अतिथि डॉ. क्रिस बोडेन ने गिद्ध संरक्षण में अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने गिद्धों के सामने मौजूद खतरों की पहचान, नियमित Monitoring System को मजबूत करने और Evidence-based उपाय विकसित करने पर जोर दिया। राज्य वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति के सदस्य राजपाल सिंह तथा WWF-India और टाइगर वॉच के प्रतिनिधि धर्मेंद्र खंडाल सहित कई संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरिजीत बनर्जी, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक के.सी.ए. अरुण प्रसाद, पवन कुमार उपाध्याय, अनुराग भारद्वाज और अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक राजेश गुप्ता सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में मुख्य वन संरक्षक के आर अनुप ने आभार व्यक्त किया।

Long-term Conservation की उम्मीद

प्रोजेक्ट रैप्टर से राजस्थान में गिद्धों और शिकारी पक्षियों की स्थिति, वितरण, आवागमन के स्वरूप और चुनौतियों को बेहतर समझने में मदद मिलने की उम्मीद है। परियोजना में खतरों की पहचान और समाधान के लिए विभागों व हितधारकों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी ध्यान रहेगा। कार्यक्रम में माना गया कि वैज्ञानिक अनुसंधान, मैदानी निगरानी और विभागीय समन्वय को जोड़कर ही प्रभावी उपाय बन सकते हैं। यह पहल राज्य के पारिस्थितिकीय संतुलन के लिए महत्वपूर्ण इन प्रजातियों के दीर्घकालीन संरक्षण में सहायक होगी।