सुप्रीम कोर्ट का फैसला राजस्थानी भाषा के स्वाभिमान की ऐतिहासिक जीत : के.सी. मालू

स्कूलों और कॉलेजों में राजस्थानी भाषा की पढ़ाई अनिवार्य होने से मायड़ भाषा को मिला नया सम्मान संवैधानिक मान्यता की दिशा में यह फैसला मील का पत्थर साबित होगा

May 14, 2026 - 14:55
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला राजस्थानी भाषा के स्वाभिमान की ऐतिहासिक जीत : के.सी. मालू

अनन्य सोच। राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिया गया ऐतिहासिक फैसला पूरे राजस्थान और देश-विदेश में बसे करोड़ों राजस्थानियों के लिए गौरव और सम्मान का विषय बन गया है। K. C. Maloo ने इस निर्णय को लोककल्याणकारी, मंगलकारी और मायड़ भाषा के स्वाभिमान की बड़ी जीत बताया है।

राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के अध्यक्ष के.सी. मालू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा राजस्थान के स्कूलों और कॉलेजों में राजस्थानी भाषा में पढ़ाई अनिवार्य करने का फैसला ऐतिहासिक और दूरगामी प्रभाव वाला है। इस निर्णय ने न केवल राजस्थानी भाषा को कानूनी मजबूती प्रदान की है, बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में राजस्थानी भाषा को मान्यता मिलने का मार्ग भी और अधिक सशक्त किया है।

के.सी. मालू के अनुसार, अब वे अभिभावक जो अपने बच्चों को राजस्थानी भाषा पढ़ाने में संकोच करते थे, वे गर्व के साथ अपने बच्चों को मायड़ भाषा में शिक्षा दिला सकेंगे। वहीं छात्र-छात्राएं भी बिना किसी हिचक के राजस्थानी विषय को अपनाकर उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर अवसर प्राप्त कर पाएंगे।

उन्होंने कहा कि यह फैसला युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए रास्ते खोलेगा। राजस्थानी भाषा में दक्ष विद्यार्थी अपने भाषाई कौशल के दम पर शिक्षा, साहित्य, मीडिया, लोककला और सांस्कृतिक क्षेत्रों में नई पहचान बना सकेंगे।

मालू ने विश्वास जताया कि सुप्रीम कोर्ट का यह ऐतिहासिक निर्णय आने वाले समय में राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने की दिशा में सबसे मजबूत आधार साबित होगा और मायड़ भाषा को उसका उचित सम्मान अवश्य मिलेगा।