“क्या दुनिया के सामने फिर मंडरा रहा है नया खतरा?”
अफ्रीका में फैले इबोला वायरस ने बढ़ाई वैश्विक चिंता, भारत ने एयरपोर्ट्स पर क्यों बढ़ाई अचानक सख्ती?
अनन्य सोच। कोरोना महामारी के बाद अब दुनिया की नजरें एक बार फिर एक खतरनाक वायरस पर टिक गई हैं। अफ्रीकी देशों में तेजी से फैल रहे इबोला वायरस के नए प्रकोप ने वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि WHO ने इसे Public Health Emergency of International Concern (PHEIC) घोषित कर दिया है। सबसे बड़ा सवाल अब यही है—क्या भारत सुरक्षित है?
DRC में तेजी से फैला नया स्ट्रेन, सैकड़ों संदिग्ध मामले
मई 2026 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) के इटुरी प्रांत में Bundibugyo स्ट्रेन के इबोला वायरस का नया प्रकोप सामने आया। Bunia, Rwampara और Mongbwalu जैसे क्षेत्रों में संक्रमण तेजी से बढ़ा। रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक 700 से अधिक संदिग्ध मामले और 150 से ज्यादा मौतें सामने आ चुकी हैं।
स्थिति इसलिए और चुनौतीपूर्ण बन गई है क्योंकि इस स्ट्रेन के लिए फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन या विशेष इलाज उपलब्ध नहीं है। स्वास्थ्य केंद्रों पर हमले, विस्थापन और सीमावर्ती इलाकों में लगातार आवागमन वायरस को रोकने में बड़ी बाधा बन रहे हैं।
आखिर कितना खतरनाक है इबोला?
विशेषज्ञों के अनुसार इबोला वायरस डिजीज (EVD) दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक मानी जाती है। यह संक्रमित जानवरों और फिर इंसानों के शारीरिक संपर्क, रक्त, पसीने या अन्य तरल पदार्थों से फैलता है।
शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन गंभीर स्थिति में आंतरिक रक्तस्राव और अंग फेल होने तक की नौबत आ सकती है। इसकी मृत्यु दर 25% से 90% तक बताई जाती है।
भारत क्यों हुआ अलर्ट मोड पर?
हालांकि भारत में अभी तक इबोला का कोई पुष्टि मामला सामने नहीं आया है, लेकिन केंद्र सरकार ने सतर्कता बढ़ा दी है। दिल्ली, कोचीन समेत कई अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स पर प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय और DGHS ने एडवाइजरी जारी करते हुए यात्रियों से 21 दिनों तक लक्षणों की निगरानी रखने को कहा है। ICMR और NIV पुणे भी टेस्टिंग और निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने में जुटे हैं।
सूत्रों के अनुसार भारत-अफ्रीका फोरम समिट को भी इबोला के खतरे को देखते हुए स्थगित किया गया है। कोविड महामारी से मिले अनुभव के आधार पर क्वारंटाइन, कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और लैब नेटवर्क को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
सबसे बड़ा ‘सीक्रेट’ क्या है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि इबोला का खतरा केवल वायरस नहीं, बल्कि लापरवाही है। अफ्रीका के कई इलाकों में शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करने से संक्रमण तेजी से फैला। यही वजह है कि WHO लगातार जागरूकता, साफ-सफाई और शुरुआती जांच पर जोर दे रहा है।
फिलहाल भारत में घबराने जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन सावधानी बेहद जरूरी है। हाथों की सफाई, संक्रमित व्यक्ति से दूरी और केवल विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी लेना ही सबसे बड़ा बचाव माना जा रहा है।
Disclaimer: यह लेख विभिन्न सार्वजनिक स्रोतों, मीडिया रिपोर्ट्स, इंटरव्यू और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से प्राप्त जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी का उद्देश्य केवल सामान्य सूचना और मनोरंजन प्रदान करना है।