घुँघरुओं की थाप पर गूंज रहा Jaipur: 51 बच्चों की Kathak साधना बनी चर्चा का विषय, Krishna Leela से सीख रहे भारतीय संस्कृति के संस्कार
डिजिटल दौर में जहां बच्चे मोबाइल और स्क्रीन की दुनिया में व्यस्त हैं, वहीं Jaipur में 51 बच्चे घुँघरू बांधकर शुद्ध Kathak Dance की साधना में जुटे हैं। एक माह तक चलने वाले इस विशेष Summer Kathak Training Camp में न केवल नृत्य की तकनीकी बारीकियां सिखाई जा रही हैं, बल्कि बच्चों को Indian Culture, Krishna Leela और गुरु-शिष्य परंपरा से भी जोड़ा जा रहा है।
अनन्य सोच। गुलाबी नगरी में इन दिनों घुँघरुओं की मधुर झंकार और तबले की थाप एक अनोखा सांस्कृतिक वातावरण रच रही है। नई पीढ़ी को भारतीय शास्त्रीय कला से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित Summer Kathak Training Camp बच्चों के लिए केवल एक प्रशिक्षण शिविर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा को समझने का जीवंत माध्यम बन गया है।
16 मई से शुरू हुआ यह विशेष शिविर 16 जून तक चलेगा। इसमें जूनियर और सीनियर वर्ग के कुल 51 बच्चे पूरे समर्पण के साथ Kathak Dance की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। शिविर में बच्चों को Tatkar, Hastak, Chakkar, Padhant, Abhinaya तथा Jaipur Gharana की पारंपरिक शैली का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस प्रशिक्षण का संचालन प्रसिद्ध नृत्य गुरु Aditi Saugani के निर्देशन में किया जा रहा है। उनके साथ सहायक प्रशिक्षक Shakti Ojha और Nehal Patni भी बच्चों को तकनीकी बारीकियों का अभ्यास करा रहे हैं। प्रशिक्षकों का लक्ष्य केवल नृत्य सिखाना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को कला की आत्मा से जोड़ना है। शिविर की सबसे खास बात यह है कि यहां बच्चों को केवल तकनीक नहीं, बल्कि Krishna Leela और पौराणिक कथाओं के भाव पक्ष का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। माखन चोरी, श्रीकृष्ण जन्म, कालिय दमन, कंस वध और द्रौपदी चीरहरण जैसे प्रसंगों को कथक के माध्यम से मंचित करने की तैयारी चल रही है। इससे बच्चों में सांस्कृतिक मूल्यों और आध्यात्मिक चेतना का विकास हो रहा है।
शिविर में रिकॉर्डेड ट्रैक के बजाय Live Music Accompaniment की व्यवस्था की गई है, जो आज के समय में दुर्लभ मानी जाती है। तबला और पखावज पर Aditya Singh Rathore एवं Vijay Banet, गायन में Ramesh Mewal तथा सारंगी पर Amaruddin Khan अपनी कला से वातावरण को जीवंत बना रहे हैं।
जब बच्चे पैरों में घुँघरू बांधकर लाइव संगीत की संगत पर नृत्य करते हैं तो उनके चेहरों पर दिखाई देने वाला उत्साह इस शिविर की सफलता की सबसे बड़ी पहचान बन जाता है। नृत्य गुरु अदिती सौगानी कहती हैं कि जब कला आनंद का माध्यम बन जाए, तब वह साधना में बदल जाती है। यही भावना इस शिविर को एक सामान्य प्रशिक्षण कार्यक्रम से कहीं अधिक विशेष बना रही है। यह Kathak Camp बच्चों को केवल मंच के लिए तैयार नहीं कर रहा, बल्कि उन्हें भारतीय सांस्कृतिक विरासत, अनुशासन, आध्यात्मिक मूल्यों और गुरु-शिष्य परंपरा से भी गहराई से जोड़ रहा है।