जवाहर कला केन्द्र का 33वां स्थापना दिवस: बाल लोक कलाकारों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग

गुरु-शिष्य परंपरा के सशक्त मंचन से सजा पहला दिन, लोकगीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों को किया मंत्रमुग्ध

जवाहर कला केन्द्र का 33वां स्थापना दिवस: बाल लोक कलाकारों ने बिखेरे लोक संस्कृति के रंग

अनन्य सोच। Jawahar Kala Kendra के 33वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय भव्य समारोह का आगाज लोक संस्कृति की जीवंत प्रस्तुतियों के साथ हुआ। समारोह के पहले दिन गुरु-शिष्य परंपरा के अंतर्गत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे प्रदेश के विभिन्न अंचलों के बाल लोक कलाकारों ने अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

कला एवं संस्कृति विभाग की संयुक्त सचिव एवं जवाहर कला केन्द्र की अतिरिक्त महानिदेशक अनुराधा गोगिया ने बताया कि इस तीन दिवसीय आयोजन के (Folk Artists) प्रथम दिन बाल लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां मुख्य आकर्षण रहीं। रंगायन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में डांडी गैर, शेखावाटी चंग, पारंपरिक मांगलिक गीत एवं विविध लोक नृत्यों की प्रस्तुतियों ने राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

(Rajasthan Culture) कार्यक्रम का शुभारंभ लंगा समूह द्वारा किया गया, जिसमें सादिक खान लंगा एवं उनके दल ने अपनी मधुर गायकी से वातावरण को सुरमयी बना दिया। उन्होंने “गजानंद जी आवो” से शुरुआत करते हुए “चैरा री माखी”, “चरखो”, “जीवडो” और “धोरा वालो देश” जैसे लोकगीत प्रस्तुत किए। इन प्रस्तुतियों ने दर्शकों को राजस्थान की मरुभूमि की संस्कृति से गहराई से जोड़ दिया।

इसके बाद चरी नृत्य की मनोहारी प्रस्तुति ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। सुश्री कृष्णा मालीकर एवं उनके समूह के बाल कलाकारों ने सिर पर जलती चरी (मटकी) रखकर संतुलन और सौंदर्य का अद्भुत प्रदर्शन किया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।

शेखावाटी क्षेत्र के प्रसिद्ध चंग नृत्य ने कार्यक्रम में उत्साह और ऊर्जा का संचार किया। बनवारी एवं उनके समूह के बाल कलाकारों ने चंग और ढप की थाप पर बांसुरी की मधुर धुन के साथ जीवंत प्रस्तुति दी। उद्घाटन दिवस की अंतिम प्रस्तुति बालोतरा के श्री दिनेश एवं उनके दल द्वारा दी गई, जिसमें ढोल-थाली की थाप पर “घेरा”, “सठिया” और मनमोहक मारवाड़ी घूमर ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।

इन प्रस्तुतियों ने यह स्पष्ट किया कि नई पीढ़ी न केवल लोक परंपराओं को आत्मसात कर रही है, बल्कि उन्हें प्रभावी रूप से आगे बढ़ाने का कार्य भी कर रही है। यह आयोजन गुरु-शिष्य परंपरा की प्रासंगिकता और सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

आगामी कार्यक्रमों की झलक
समारोह के दूसरे दिन 9 अप्रैल 2026 को सायं 7:30 बजे रंगायन सभागार में मुजफ्फर रहमान एवं उनके समूह द्वारा ताल वाद्य कचहरी प्रस्तुत की जाएगी। वहीं 10 अप्रैल को प्रातः 10:00 बजे बाल फिल्म सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा फिल्म प्रदर्शन तथा सायं 6:30 बजे वाद्य वादन, घूमर, भवाई और डेरु नृत्य की आकर्षक प्रस्तुतियां होंगी।

जवाहर कला केन्द्र द्वारा आयोजित इस समारोह में सभी विशिष्ट अतिथियों एवं आमजन को आमंत्रित किया गया है तथा सभी कार्यक्रमों में प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। यह आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में एक सशक्त प्रयास है।