पशुपालन में नई रफ्तार: 6 तरल नाइट्रोजन वाहनों को मिली हरी झंडी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा संबल
राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत मजबूत होगी कृत्रिम गर्भाधान व्यवस्था, पशुपालकों तक पहुंचेगी बेहतर सेवाएं
अनन्य सोच। राज्य सरकार पशुपालन क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर सक्रिय प्रयास कर रही है। इसी दिशा में सोमवार को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पशुपालन, डेयरी, गोपालन एवं मत्स्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री विकास सीताराम भाले ने 6 तरल नाइट्रोजन परिवहन वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह पहल प्रदेश में पशुधन विकास और ग्रामीण रोजगार को नई गति प्रदान करेगी।
इस अवसर पर श्री भाले ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार पशुपालकों के कल्याण और पशुधन संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार की योजनाओं और नीतियों के परिणामस्वरूप पशुपालन आज लाखों लोगों के लिए रोजगार का सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है।
उन्होंने बताया कि तरल नाइट्रोजन का उपयोग विशेष रूप से कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रमों में किया जाता है, जो पशुधन की गुणवत्ता सुधारने में अहम भूमिका निभाता है। इसके सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन के लिए इन विशेष वाहनों की व्यवस्था की गई है, जिससे दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक भी उच्च गुणवत्ता वाली सेवाएं आसानी से पहुंच सकेंगी।
यह वाहन केन्द्र सरकार की 100 प्रतिशत वित्त पोषित राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना के तहत उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पहले चरण में 20 जिलों को यह सुविधा दी जा चुकी है, जबकि अब अलवर, खैरथल-तिजारा, कोटपुतली-बहरोड़, सलूम्बर, फलौदी और जैसलमेर जिलों को यह वाहन उपलब्ध कराए गए हैं।
कार्यक्रम में पशुपालन विभाग के निदेशक एवं राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. सुरेशचंद मीणा, अतिरिक्त निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार, डॉ. संजय कुमार, डॉ. जुगलकिशोर मिश्रा, डॉ. लक्ष्मण राव तथा आरएलडीबी के प्रबंधक डॉ. प्रीतपाल कालरा सहित कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
यह पहल न केवल पशुधन की गुणवत्ता में सुधार लाएगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी।