Platonic Love 2.0: जयपुर में अंशु हर्ष की काव्य प्रस्तुति, मीराबाई की प्रेम चेतना से प्रेरित रूहानी सफर

जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में कवयित्री अंशु हर्ष ने Platonic Love 2.0 प्रस्तुत की। कविताओं और संगीत के जरिए मीराबाई से प्रेरित निःस्वार्थ प्रेम की अभिव्यक्ति

Oct 17, 2026 - 23:26
Oct 17, 2026 - 23:34
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Platonic Love 2.0: जयपुर में अंशु हर्ष की काव्य प्रस्तुति, मीराबाई की प्रेम चेतना से प्रेरित रूहानी सफर

अनन्य सोच । साहित्य, संगीत और संवेदनाओं के संगम के रूप में कवयित्री एवं लेखिका अंशु हर्ष की विशेष Poetry Performance 'प्लेटोनिक लव 2.0' का आयोजन राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, जयपुर के मुख्य सभागार में हुआ। राकेश राठी प्रोडक्शंस की प्रस्तुति इस कार्यक्रम में अंशु हर्ष ने कविताओं और गीतों के माध्यम से प्रेम के शुद्ध, निःस्वार्थ और आध्यात्मिक स्वरूप को अभिव्यक्त किया। पियानो और वोकल पर अमित गंधर्व तथा बांसुरी पर संदीप सोनी ने संगत की।

मीराबाई से मिली प्रेरणा

'प्लेटोनिक लव' की संकल्पना के पीछे भक्त शिरोमणि मीराबाई का कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम प्रमुख प्रेरणास्रोत रहा है। मीरा का प्रेम देह की सीमाओं से परे समर्पण, प्रतीक्षा, विश्वास और भक्ति का भाव है। अंशु हर्ष मेड़ता की ही रहने वाली हैं, जिस धरती ने मीराबाई को जन्म दिया। उनके लिए यह गर्व का विषय है और इसी आध्यात्मिक विरासत से उनकी कविताओं में Platonic Love का भाव आकार लेता है।

मन के रिश्ते की काव्यात्मक अभिव्यक्ति

प्रस्तुति में उस लगाव को स्वर दिया गया, जो कभी ईश्वर के प्रति आस्था जैसा है, कभी उसके दर पर दीप जलाने जैसा और कभी मीरा के समर्पण जैसा। यह भक्त और भगवान का संबंध भी हो सकता है और किसी ऐसे व्यक्ति से आत्मिक जुड़ाव भी, जिसकी उपस्थिति मन को सुकून देती है। ऐसा रिश्ता आकर्षण से शुरू होकर धीरे-धीरे विश्वास और अपनत्व में बदलता है। इसमें मिलने की अनिवार्यता, संवाद की अपेक्षा या अधिकार की शर्त नहीं होती।

भागती दुनिया में ठहराव का संदेश

अंशु हर्ष की कविताएँ और आवाज़ श्रोताओं को ठहरने, स्वयं से जुड़ने और प्रेम को भीतर आत्मसात करने की प्रेरणा देती हैं। प्रस्तुति उन अनकहे भावों को महसूस करने के लिए प्रेरित करती है, जिन्हें जीवन की आपाधापी में अक्सर पीछे छोड़ दिया जाता है।

प्रेम: एक जीवन-दृष्टि

संघर्षों, तनावों और संवेदनहीनता से घिरे इस दौर में प्रेम को केवल दूसरे में खोजने के बजाय अपने भीतर बसाना अधिक जरूरी बताया गया। आयोजकों के अनुसार प्रेम केवल अनुभूति नहीं, बल्कि जीवन को देखने की दृष्टि है, जो इंसान को अधिक संवेदनशील, सहज और मानवीय बनाती है।