रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना का 10वां चरण 1 मई से, कम लागत और पारदर्शिता से निवेशकों का बढ़ा भरोसा

5500+ औद्योगिक भूखण्ड उपलब्ध, ई-लॉटरी 19 मई को; एमओयू नियमों में राहत से निवेश को मिलेगा नया बल

रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना का 10वां चरण 1 मई से, कम लागत और पारदर्शिता से निवेशकों का बढ़ा भरोसा

अनन्य सोच। राजस्थान में औद्योगिक निवेश को गति देने की दिशा में राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इनवेस्टमेंट समिट में निवेशकों के साथ हुए एमओयू के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने यह भरोसा दिलाया था कि ये समझौते जल्द ही जमीनी निवेश में बदलेंगे। इसी संकल्प को साकार करने के लिए राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) की प्रत्यक्ष आवंटन योजना एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है।

मार्च 2025 में शुरू की गई इस योजना ने कम लागत और पारदर्शी प्रक्रिया के चलते निवेशकों के बीच विशेष विश्वास कायम किया है। अब तक योजना के तहत 1662 औद्योगिक भूखण्डों के लिए आवंटन या ऑफर लेटर जारी किए जा चुके हैं, जो राज्य में औद्योगिक विकास की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।

रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना का दसवां चरण 1 मई 2026 से शुरू होगा, जिसमें निवेशक 14 मई तक ईएमडी जमा कर आवेदन कर सकेंगे। इस बार उद्यमियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। पहले योजना में भाग लेने के लिए चरण शुरू होने से 15 दिन पहले एमओयू करना अनिवार्य था, लेकिन अब निवेशक चरण प्रारंभ होने के बाद भी अंतिम तिथि तक एमओयू कर आवेदन कर सकते हैं।

दसवें चरण में 103 औद्योगिक क्षेत्रों में 5500 से अधिक औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक भूखण्ड उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें आबूरोड, अलवर, अजमेर, बालोतरा, भीलवाड़ा, भिवाड़ी, बीकानेर, जयपुर, कोटा और सीकर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं, जो निवेशकों के लिए विविध अवसर प्रस्तुत करते हैं।

योजना के तहत 19 मई 2026 को ई-लॉटरी का आयोजन होगा। जिन भूखण्डों के लिए केवल एक आवेदन प्राप्त होगा, उनका सीधा आवंटन किया जाएगा, जबकि एक से अधिक आवेदन होने पर पारदर्शी ई-लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

पिछले नौ चरणों में 1662 भूखण्डों का आवंटन हो चुका है, जिनका कुल क्षेत्रफल लगभग 437 हेक्टेयर और मूल्य 2500 करोड़ रुपये से अधिक है। इन भूखण्डों पर स्थापित होने वाली इकाइयों से राज्य में करीब 18,000 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना जताई जा रही है।

निवेशकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए योजना की वैधता 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है, जिससे राजस्थान में औद्योगिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।