“जब जनता जागे, धरती मुस्कुराए: पृथ्वी दिवस 2026 बना जनशक्ति का वैश्विक महाअभियान”
जयपुर डेस्क। हमारी शक्ति, हमारा ग्रह’ थीम के साथ नवीकरणीय ऊर्जा की ओर दुनिया का बड़ा कदम, भारत में युवाओं की अगुवाई
अनन्य सोच। 22 अप्रैल को मनाया जाने वाला 56वां विश्व पृथ्वी दिवस इस बार एक नई सोच और जनभागीदारी का प्रतीक बनकर उभर रहा है। ‘Our Power, Our Planet’ (हमारी शक्ति, हमारा ग्रह) थीम के साथ यह दिवस दुनिया को यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल नीतियों का विषय नहीं, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है। EARTHDAY.ORG के अनुसार, इस वर्ष का फोकस लोगों की सामूहिक शक्ति को जागरूक कर पृथ्वी को बचाने पर है।
1970 में अमेरिका से शुरू हुआ यह आंदोलन आज 193 देशों में फैल चुका है। 18 अप्रैल से शुरू हुआ ‘अर्थ वीक’ दुनियाभर में जागरूकता की लहर पैदा कर रहा है। जगह-जगह सफाई अभियान, वृक्षारोपण, शांति मार्च और शिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस बार विशेष जोर जीवाश्म ईंधन से हटकर सौर, पवन और अन्य हरित ऊर्जा स्रोतों को अपनाने पर है, ताकि जलवायु परिवर्तन के खतरे को कम किया जा सके।
भारत में भी पृथ्वी दिवस को लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने देशभर के शिक्षण संस्थानों और संगठनों को इस थीम पर कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया है। ‘हर घर सौर ऊर्जा’ और ‘स्वच्छ ऊर्जा, उज्ज्वल भविष्य’ जैसे अभियानों के माध्यम से आमजन को जागरूक किया जा रहा है।
बिहार के सारण जिले में चल रहा विशेष अभियान युवाओं की भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां ‘प्लास्टिक वॉरियर्स’ बनकर युवा प्रदूषण के खिलाफ मोर्चा संभाल रहे हैं। वहीं दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे शहरों में बड़े स्तर पर इवेंट्स, वर्कशॉप्स और प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं।
वैश्विक आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो 2030 तक ग्लोबल वार्मिंग 1.5 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो सकती है। हालांकि भारत ने 50 गीगावाट से अधिक सौर ऊर्जा क्षमता जोड़कर उम्मीद की किरण भी दिखाई है।
यह पृथ्वी दिवस हमें याद दिलाता है कि छोटे प्रयास—जैसे प्लास्टिक का कम उपयोग, ऊर्जा की बचत और पेड़ लगाना—बड़े बदलाव ला सकते हैं। आइए, हम सभी मिलकर अपनी शक्ति को पहचानें और धरती को सुरक्षित भविष्य दें।