“हर जीवन अनमोल”: अनंत अंबानी की कोलंबिया से 80 दरियाई घोड़ों को बचाने की मानवीय अपील

‘वनतारा’ में आजीवन सुरक्षित आवास का प्रस्ताव, वैज्ञानिक और संवेदनशील समाधान की पहल

“हर जीवन अनमोल”: अनंत अंबानी की कोलंबिया से 80 दरियाई घोड़ों को बचाने की मानवीय अपील

अनन्य सोच। दक्षिण अमेरिका के देश कोलंबिया में दरियाई घोड़ों (हिप्पो) को मारने के प्रस्ताव के बीच एक संवेदनशील और मानवीय पहल सामने आई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के कार्यकारी निदेशक और विश्व के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण केंद्र ‘वनतारा’ के संस्थापक अनंत मुकेश अंबानी ने कोलंबिया सरकार से 80 दरियाई घोड़ों की जान बख्शने की अपील की है। उन्होंने इन जानवरों को सुरक्षित रूप से भारत लाकर जामनगर स्थित ‘वनतारा’ में आजीवन संरक्षण देने का प्रस्ताव रखा है।

कोलंबिया में बढ़ती संख्या बना चिंता का कारण
कोलंबिया की मैग्डालियाना नदी घाटी में दरियाई घोड़ों की संख्या 200 से अधिक हो चुकी है, जिससे स्थानीय जैव विविधता और अन्य जीवों के लिए खतरा उत्पन्न हो रहा है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए 80 हिप्पो को मारने का निर्णय लिया गया है, जिसे लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता जताई जा रही है।

पर्यावरण मंत्री को भेजा औपचारिक प्रस्ताव
अनंत अंबानी ने कोलंबिया की पर्यावरण मंत्री आइरीन वेलेज़ टोरेस को लिखे पत्र में इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की अपील की है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि कोलंबियाई अधिकारियों की निगरानी में इन जानवरों को वैज्ञानिक और सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित किया जाए। ‘वनतारा’ ने इस प्रक्रिया के लिए पूर्ण तकनीकी और लॉजिस्टिक सहयोग देने की पेशकश की है।

वैज्ञानिक योजना और विशेषज्ञ टीम तैयार
वनतारा द्वारा प्रस्तुत योजना में पशु-चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम, सुरक्षित ट्रांसपोर्ट, बायो-सिक्योरिटी प्रोटोकॉल और प्राकृतिक वातावरण जैसा आवास शामिल है। अनंत अंबानी ने कहा कि ये जीव परिस्थितियों के शिकार हैं और उन्हें बचाना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।

करुणा और विज्ञान का संतुलन जरूरी
अनंत अंबानी के अनुसार, “करुणा और सुरक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। सही वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ हम प्रकृति और समुदाय दोनों की रक्षा कर सकते हैं।” हाल ही में उन्हें पशु कल्याण के क्षेत्र में योगदान के लिए ‘ग्लोबल ह्यूमेन अवार्ड’ से सम्मानित भी किया गया है।

निर्णय पर रोक लगाने की मांग
वनतारा ने अनुरोध किया है कि जब तक इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार न हो, तब तक दरियाई घोड़ों को मारने के फैसले को स्थगित रखा जाए। यह पहल भारत की वैश्विक वन्यजीव संरक्षण में बढ़ती भूमिका को भी दर्शाती है।