जब मंच पर जीवंत हुई विभाजन की पीड़ा: ‘तमस’ ने जयपुर को रुलाया, सोचने पर किया मजबूर

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के Summer Theatre Festival का जयपुर में भावनात्मक आगाज़ भीष्म साहनी के चर्चित उपन्यास Tamas पर आधारित नाटक “विभाजन... विभीषिका... तमस...” के प्रभावशाली मंचन के साथ हुआ। Partition Tragedy, Human Values और Communal Harmony का गहरा संदेश देने वाली इस प्रस्तुति ने दर्शकों को इतिहास के उन दर्दनाक पन्नों से रूबरू कराया, जिन्हें भुला पाना आज भी आसान नहीं है।

Jun 6, 2026 - 21:30
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जब मंच पर जीवंत हुई विभाजन की पीड़ा: ‘तमस’ ने जयपुर को रुलाया, सोचने पर किया मजबूर

अनन्य सोच। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर के मुख्य प्रेक्षागृह में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के ग्रीष्मकालीन रंगमहोत्सव का शुभारंभ ऐसे नाटक से हुआ जिसने दर्शकों को भावनाओं के गहरे समंदर में डुबो दिया। भीष्म साहनी के प्रसिद्ध उपन्यास Tamas पर आधारित नाटक “विभाजन... विभीषिका... तमस...” का मंचन दर्शकों के लिए एक यादगार अनुभव बन गया।

राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय के निदेशक चित्तारंजन त्रिपाठी के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने भारत-विभाजन की त्रासदी, विस्थापन के दर्द और सांप्रदायिक हिंसा से प्रभावित आम लोगों के संघर्ष को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ मंच पर उतारा। कलाकारों के सशक्त अभिनय, प्रभावशाली संवाद और जीवंत मंच-सज्जा ने दर्शकों को वर्ष 1947 के उस दौर में पहुंचा दिया, जब लाखों लोग हिंसा और भय के साये में जीने को मजबूर थे।

नाटक का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह रहा कि इसमें केवल विभाजन का दर्द ही नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी जीवित रहने वाली मानवता, करुणा और सह-अस्तित्व की भावना को भी प्रमुखता से दिखाया गया। प्रस्तुति ने यह संदेश दिया कि नफरत की राजनीति समाज को तोड़ सकती है, लेकिन इंसानियत हमेशा लोगों को जोड़ने का काम करती है।

कार्यक्रम में चित्तारंजन त्रिपाठी द्वारा तैयार संगीत ने भी दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। कबीर की वाणियों और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं के संयोजन ने प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

रंगमहोत्सव के अगले चरण में 7 जून को मोहन राकेश के चर्चित नाटक “आधे अधूरे” का मंचन किया जाएगा। हालांकि पहले ही दिन “तमस” ने दर्शकों के दिलों पर ऐसी छाप छोड़ी कि इसकी चर्चा देर रात तक रंगप्रेमियों के बीच होती रही।