राजस्थान में 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' की तैयारी तेज: CM भजनलाल शर्मा को सौंपी गई OBC आरक्षण रिपोर्ट, जानें क्या होगा बड़ा बदलाव

Aug 5, 2026 - 23:00
Aug 5, 2026 - 23:02
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राजस्थान में 'वन स्टेट-वन इलेक्शन' की तैयारी तेज: CM भजनलाल शर्मा को सौंपी गई OBC आरक्षण रिपोर्ट, जानें क्या होगा बड़ा बदलाव

अनन्य सोच । Rajasthan OBC Commission Report: प्रदेश में पंचायती राज और नगरीय निकाय चुनावों को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जिसका सीधा असर राजस्थान के लोकतांत्रिक ढांचे पर पड़ने वाला है। बुधवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई एक अहम मुलाकात ने प्रदेश की राजनीतिक तस्वीर को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं।

जयपुर में बुधवार को राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के अध्यक्ष मदनलाल भाटी एवं आयोग के सदस्यों ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात की। इस दौरान आयोग ने पंचायती एवं नगरीय निकायों में OBC Reservation से जुड़ा वर्ष 2026 का महत्वपूर्ण प्रतिवेदन मुख्यमंत्री को सौंपा।

"जमीनी स्तर पर मजबूत होगा लोकतंत्र" - CM भजनलाल शर्मा

इस मौके पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार जमीनी स्तर पर Democracy को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि स्थानीय चुनावों को समय पर कराने का जो वादा सरकार ने किया था, उस दिशा में तेजी से काम हो रहा है और जल्द ही यह वादा हकीकत में बदलेगा।

One State-One Election से कैसे बचेगा समय और पैसा?

मुख्यमंत्री ने इस दौरान 'One State-One Election' व्यवस्था पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि इस नई व्यवस्था से विकास और जनकल्याण से जुड़े कार्यों को निरंतर गति मिलेगी। बार-बार होने वाले अलग-अलग चुनावों की जगह एक साथ चुनाव कराने से न केवल सरकारी खजाने के पैसों की बचत होगी, बल्कि प्रशासनिक समय और संसाधनों का भी बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे प्रदेश के Development Works बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ पाएंगे।

कई बड़े मंत्री और अधिकारी रहे मौजूद

इस अहम बैठक में पंचायतीराज मंत्री मदन दिलावर, विधि एवं न्याय मंत्री जोगाराम पटेल, नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा और मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। साथ ही OBC आयोग के सचिव अशोक कुमार जैन और सदस्य प्रो. राजीव सक्सैना, गोपाल कृष्ण, मोहन मोरवाल व पवन मावंडिया भी बैठक का हिस्सा बने।

अब देखने वाली बात यह होगी कि इस प्रतिवेदन के आधार पर राज्य सरकार स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर आगे क्या ठोस कदम उठाती है और OBC आरक्षण को लेकर प्रदेश में कब तक स्पष्टता आती है।