बोल नहीं सकते थे, फिर भी सुना दी पूरे सिस्टम को हकीकत! सांकेतिक भाषा में जब बच्चों ने खोली स्कूल की पोल, तो हिल गया प्रशासन

जयपुर के मूक-बधिर स्कूल में दो-तीन घंटे तक चला अनोखा प्रदर्शन, गेट बंद कर स्टाफ को बनाया बंधक, अंजाम देख हर कोई हैरान

Aug 6, 2026 - 07:15
Aug 6, 2026 - 07:28
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बोल नहीं सकते थे, फिर भी सुना दी पूरे सिस्टम को हकीकत! सांकेतिक भाषा में जब बच्चों ने खोली स्कूल की पोल, तो हिल गया प्रशासन

अनन्य सोच। बुधवार यानी 5 अगस्त 2026 को जयपुर के त्रिमूर्ति सर्किल (जेएलएन मार्ग) स्थित राजकीय सेठ आनंदीलाल पोद्दार Deaf and Mute School में एक ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया। स्कूल खुलते ही यहां के विद्यार्थी सड़क पर उतर आए और Sign Language, तख्तियों तथा लिखित संदेशों के जरिए अपनी पीड़ा बयां करने लगे। जिन बच्चों की आवाज आमतौर पर अनसुनी रह जाती है, उन्होंने आज साबित कर दिया कि खामोशी भी सबसे तेज चीख बन सकती है।

छात्रों का आरोप था कि स्कूल के Toilets इस्तेमाल के लायक नहीं बचे हैं, कक्षाओं की दीवारों और कमरों में बड़ी-बड़ी दरारें आ चुकी हैं, पीने के पानी की भी उचित व्यवस्था नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बच्चे लंबे समय से इन समस्याओं की शिकायत कर रहे थे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हॉस्टल में खाने और सफाई को लेकर भी गंभीर शिकायतें सामने आईं। गुस्साए छात्रों ने करीब तीन घंटे तक प्रदर्शन जारी रखा और इस दौरान स्कूल का गेट बंद कर प्रिंसिपल व स्टाफ को परिसर के भीतर ही रोक लिया।

जैसे ही यह मामला सामने आया, शिक्षा विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। निरीक्षण में बच्चों की सभी शिकायतें सही पाई गईं। इसके बाद विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रिंसिपल भरत जोशी को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया, और बाद में उनके निलंबन तथा विभागीय जांच के आदेश भी जारी कर दिए गए। इसके साथ ही एक अध्यापक और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को भी एपीओ (APO) कर दिया गया।

अब स्कूल की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए एक विशेष कमेटी गठित की गई है, जो सफाई, पेयजल, भवन की स्थिति और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे सुधार कार्य कराए जाएंगे। अधिकारियों ने Sign Language विशेषज्ञों की मदद से छात्रों से बातचीत की और जल्द ही सभी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिलाया। सवाल यह है कि क्या अब वाकई बच्चों की सुनवाई होगी, या यह भी सिर्फ कागजी कार्रवाई बनकर रह जाएगी?