‘ग्रीन रेलवे’ की रफ्तार से बदली तस्वीर! उत्तर पश्चिम रेलवे ने बिजली, सौर ऊर्जा और ईंधन बचत में बनाया बड़ा रिकॉर्ड
80% यात्री ट्रेनें अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर, सिर्फ एक महीने में सौर ऊर्जा से लाखों यूनिट बिजली उत्पादन और करोड़ों की बचत
अनन्य सोच। उत्तर पश्चिम रेलवे ने ऊर्जा संरक्षण, सौर ऊर्जा उत्पादन और रेलवे विद्युतीकरण के क्षेत्र में ऐसी उपलब्धियां हासिल की हैं, जो न सिर्फ रेलवे के आधुनिकीकरण की कहानी कहती हैं, बल्कि ‘ग्रीन इंडिया’ की दिशा में बड़ा कदम भी मानी जा रही हैं। अप्रैल 2026 के आंकड़ों ने साफ कर दिया है कि अब रेलवे सिर्फ सफर का माध्यम नहीं, बल्कि तकनीक और ऊर्जा दक्षता का नया मॉडल बनता जा रहा है।
मुख्य जनसम्पर्क अधिकारी Amit Sudarshan के अनुसार, भगत की कोठी इलेक्ट्रिक लोको शेड में अब तक कुल 181 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव सफलतापूर्वक कमीशन किए जा चुके हैं। इनमें 78 WAP-7 और 103 WAG-9 HC लोकोमोटिव शामिल हैं। यह उपलब्धि उत्तर पश्चिम रेलवे की बढ़ती इलेक्ट्रिक क्षमता और आधुनिक तकनीक अपनाने की दिशा में बड़ी सफलता मानी जा रही है।
80% यात्री ट्रेनें अब बिजली से दौड़ रहीं
रेलवे के चारों मंडलों में वर्तमान में 226 जोड़ी यात्री ट्रेनें इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन पर संचालित हो रही हैं, जो कुल यात्री ट्रेनों का लगभग 80 प्रतिशत है। वहीं माल परिवहन का करीब 61 प्रतिशत हिस्सा भी अब इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन से किया जा रहा है। इससे डीजल पर निर्भरता कम होने के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिली है।
सौर ऊर्जा से चमकी रेलवे की बचत
अप्रैल 2026 में रेलवे के सौर संयंत्रों से करीब 15.80 लाख यूनिट बिजली का उत्पादन किया गया। वहीं डीजल लोकोमोटिव को निष्क्रिय समय में बंद रखने की पहल से 509 किलोलीटर ईंधन की बचत हुई, जिससे लगभग ₹4.72 करोड़ की बड़ी बचत दर्ज की गई।
जयपुर से जोधपुर तक ‘ग्रीन मिशन’
जयपुर, अजमेर, बीकानेर और जोधपुर मंडलों में रूफटॉप सोलर परियोजनाओं पर तेजी से काम जारी है। अप्रैल 2026 तक 348 किलोवाट सौर क्षमता का कमीशनिंग कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अलावा रेलवे में कवच सुरक्षा प्रणाली, एलईडी हेडलाइट और केब एसी जैसी आधुनिक सुविधाओं का विस्तार भी लगातार किया जा रहा है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि आने वाले समय में उत्तर पश्चिम रेलवे देश के सबसे आधुनिक और ऊर्जा दक्ष रेलवे जोन में शामिल हो सकता है।