जयपुर में 24 फरवरी से होलाष्टक प्रारंभ, 19 फरवरी को मनाई जाएगी फुलेरा दूज
Ananya soch
अनन्य सोच। फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी से 24 फरवरी को होलाष्टक प्रारंभ होगा, जिसका समापन 3 मार्च को होलिका दहन के साथ होगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. महेन्द्र मिश्रा के अनुसार होलाष्टक के आठ दिनों में सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु सहित सभी ग्रह उग्र प्रभाव में रहते हैं। इस कारण विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे मांगलिक कार्य इस अवधि में वर्जित माने जाते हैं। नकारात्मक प्रभाव से बचने के लिए हवन-पूजन, मंत्र जाप और धार्मिक अनुष्ठान करना लाभकारी बताया गया है.
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान अन्न, वस्त्र और धन का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। भगवान विष्णु, भगवान शिव, हनुमानजी एवं भक्त प्रह्लाद की पूजा का विशेष महत्व है। ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ और महामृत्युंजय मंत्र का जाप मानसिक शांति प्रदान करता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भद्रा रहित प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा में होलिका दहन श्रेष्ठ माना गया है।
वहीं, फाल्गुन शुक्ल द्वितीया 19 फरवरी को फुलेरा दूज मनाई जाएगी। इसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है, जिसमें विवाह और अन्य मांगलिक कार्य शुभ होते हैं। इस दिन मंदिरों में भगवान श्रीकृष्ण और राधा के सम्मान में फूलों से विशेष सजावट की जाएगी.