‘ऐ री सखी…’ के सुरों में डूबा जयपुर: सोलफुल कव्वाली फेस्टिवल का रुहानी समापन

‘ऐ री सखी…’ के सुरों में डूबा जयपुर: सोलफुल कव्वाली फेस्टिवल का रुहानी समापन

Ananya soch: Jaipur Cultural Event

अनन्य सोच। Qawwali Festival: सांस्कृतिक नगरी जयपुर में आयोजित दो दिवसीय ‘सोलफुल कव्वाली फेस्टिवल’ का समापन बुधवार को बेहद खुशनुमा और आध्यात्मिक माहौल में हुआ। जवाहर कला केंद्र के कृष्णायन सभागार में सजी इस महफिल ने सूफियाना सुरों से हर दिल को छू लिया।

अनवर हुसैन नियाज़ी ने बांधा समां

कार्यक्रम के अंतिम दिन Jawahar Kala Kendra में उस्ताद अनवर हुसैन नियाज़ी ने अपनी टीम के साथ सूफी कलामों की ऐसी प्रस्तुति दी कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। कौल से शुरुआत करते हुए उन्होंने महफिल को धीरे-धीरे आध्यात्मिक ऊंचाइयों तक पहुंचाया।

अमीर खुसरो के कलाम ने जीता दिल

(Sufi Music) कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण अमीर खुसरो का कालजयी कलाम ‘ऐ री सखी मोरे पिया घर आए…’ रहा। इसकी दिलकश प्रस्तुति ने पूरे सभागार को भाव-विभोर कर दिया। वहीं ‘ख्वाजा जी थारी अखियन से बरसे गुलाल…’ जैसे भजन ने साम्प्रदायिक सौहार्द का संदेश दिया।

संगीत और आध्यात्म का अद्भुत संगम

(Rajasthan Events) हारमोनियम, तबला और ढोलक की जुगलबंदी ने हर प्रस्तुति को खास बना दिया। सूफी परंपरा की झलक से भरपूर हर कलाम ने श्रोताओं को आध्यात्मिक अनुभूति कराई। फरमाइश पर पेश की गई मनकबत ने माहौल को और भी रंगीन बना दिया।

इस प्रस्तुति में मुनव्वर हुसैन नियाज़ी, वाहिद हुसैन, शादाब हुसैन, नवेद हुसैन, अशरफ हुसैन, दानिश हुसैन और नदीम खान ने शानदार संगत दी।

आयोजक इकबाल खान नियाज़ी ने बताया कि यह फेस्टिवल राजस्थान के प्रसिद्ध कव्वाल मोहम्मद सिद्दीक को समर्पित रहा। संचालन रहमान हरफनमौला ने किया।