‘बीसलपुर से उठेगी जल क्रांति की नई लहर’: राजस्थान में शुरू होगा ऐसा अभियान, जो बदल सकता है आने वाली पीढ़ियों का भविष्य

सिर्फ सरकारी योजना नहीं… गांव-गांव में जल बचाने का जनसंकल्प बनेगा ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ 25 मई से 5 जून तक पूरे प्रदेश में होंगे हजारों कार्यक्रम, जल स्रोतों पर दीपदान से लेकर जल योद्धाओं के सम्मान तक चलेगा महाअभियान

May 24, 2026 - 15:19
May 24, 2026 - 15:28
 0
‘बीसलपुर से उठेगी जल क्रांति की नई लहर’: राजस्थान में शुरू होगा ऐसा अभियान, जो बदल सकता है आने वाली पीढ़ियों का भविष्य

अनन्य सोच। राजस्थान की तपती धरती पर इस बार सिर्फ बारिश का इंतजार नहीं होगा, बल्कि हर गांव, हर शहर और हर घर में पानी बचाने का संकल्प भी गूंजेगा। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राज्य सरकार 25 मई से ‘वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान’ की शुरुआत करने जा रही है। गंगा दशमी से शुरू होकर विश्व पर्यावरण दिवस 5 जून तक चलने वाला यह अभियान केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की सबसे बड़ी कोशिश माना जा रहा है।

इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल विभागीय गतिविधियां नहीं होंगी, बल्कि गांव-गांव में लोगों की भागीदारी से जल स्रोतों की सफाई, दीपदान, प्रभात फेरियां, जल चौपाल, पौधारोपण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा। सरकार का लक्ष्य है कि पानी बचाने की जिम्मेदारी केवल प्रशासन तक सीमित न रहे, बल्कि हर नागरिक इसे अपने जीवन का प्रण बनाए।

बीसलपुर बांध से होगी शुरुआत, भरतपुर में गूंजेगी गंगा आरती

अभियान का शुभारंभ 25 मई को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा टोंक स्थित बीसलपुर बांध पर जल पूजन और शिव अभिषेक के साथ करेंगे। इसके साथ ही वे ईसरदा, बंध बरेठा और गालवा बांध का हवाई सर्वेक्षण भी करेंगे। वहीं भरतपुर में गंगा माता मंदिर पर विशेष आरती और सुजानगंगा नहर में दीपदान कार्यक्रम आयोजित होगा।

प्रदेशभर में इसी दिन कुओं, बावड़ियों, तालाबों, नहरों और जोहड़ों पर सामूहिक स्वच्छता अभियान और दीप प्रज्ज्वलन किया जाएगा। प्रशासन के साथ पंचायतें, धार्मिक संगठन, स्वयंसेवी संस्थाएं, महिलाएं, युवा और उद्योग जगत भी इस अभियान से जुड़ेंगे।

जल बचाने के साथ जागरूकता का भी महाअभियान

अभियान के दौरान विद्यार्थियों के लिए लेखन प्रतियोगिताएं, प्रभात फेरियां और जागरूकता कार्यक्रम होंगे। राजीविका से जुड़ी महिलाएं कलश यात्राएं निकालेंगी, जबकि गांवों में जल चौपालों के जरिए लोगों को वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण की तकनीकों की जानकारी दी जाएगी।

रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और मंडियों में ‘वंदे गंगा जल सेवा’ कार्यक्रम के तहत आमजन को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। वहीं सरकारी भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की सफाई और मरम्मत भी की जाएगी।

गांवों की पुरानी बावड़ियां और तालाब फिर बनेंगे पहचान

इस अभियान के तहत प्राचीन जल स्रोतों की मैपिंग, साफ-सफाई और पुनर्जीवन पर विशेष फोकस रहेगा। नहरों और खालों की सफाई, गाद निकालने और नए जल संरक्षण कार्यों के शिलान्यास भी किए जाएंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान जैसे जल संकट प्रभावित राज्य में यह अभियान केवल पर्यावरणीय पहल नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए जीवन बचाने की तैयारी है।

आखिर ऐसा क्या होगा अंतिम दिन, जिसका इंतजार रहेगा पूरे प्रदेश को?

5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर जिला स्तरीय समापन समारोह आयोजित होंगे। इस दौरान जल संरक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले भामाशाहों, पंचायतों, संस्थाओं और ‘जल योद्धाओं’ को “जल गौरव सम्मान” से सम्मानित किया जाएगा। साथ ही सांस्कृतिक संध्या और ईको-फ्रेंडली कार्यक्रमों के जरिए अभियान का समापन होगा।

पिछले वर्ष इस अभियान के तहत 11 हजार ग्राम पंचायतों में 3 लाख 70 हजार से अधिक कार्यक्रम हुए थे और 2 करोड़ 53 लाख लोगों ने भागीदारी निभाई थी। इस बार सरकार का लक्ष्य इससे भी बड़ा है—जल संरक्षण को लोगों की आदत बनाना।