सोमनाथ अमृत महोत्सव: सनातन स्वाभिमान और सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव
सोमनाथ मंदिर भारत की आस्था, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक विरासत का अमर प्रतीक – मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
अनन्य सोच। सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ देशभर में श्रद्धा, गौरव और सांस्कृतिक चेतना के उत्सव के रूप में मनाया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि सोमनाथ मंदिर भारत की सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय स्वाभिमान और अटूट आस्था का प्रतीक है। विदेशी आक्रांताओं द्वारा कई बार ध्वस्त किए जाने के बावजूद यह मंदिर हर बार और अधिक भव्यता और स्वाभिमान के साथ पुनः स्थापित हुआ, जो भारतीय संस्कृति की अजेय शक्ति का प्रमाण है।
मुख्यमंत्री सोमवार को झारखंड महादेव मंदिर में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान वे गुजरात स्थित सोमनाथ मंदिर में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ कार्यक्रम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े और प्रधानमंत्री के संबोधन को सुना।
प्रधानमंत्री ने की पूजा-अर्चना, देश की समृद्धि की कामना
सोमनाथ मंदिर पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचे, जहां शंख और डमरू वादन के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना कर देश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर भारतीय वायु सेना की सूर्य किरण एरोबेटिक टीम ने सोमनाथ मंदिर के ऊपर भव्य फ्लाईपास्ट कर आकाश में तिरंगे और केसरिया रंगों की अद्भुत छटा बिखेरी। प्रधानमंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि भी दी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि “सोमनाथ अमृत महोत्सव केवल अतीत का उत्सव नहीं, बल्कि आने वाले हजार वर्षों के भारत की प्रेरणा का महोत्सव है।” उन्होंने कहा कि भारत आज आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है और इस सांस्कृतिक निरंतरता ने देश को नई ऊर्जा प्रदान की है।
करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है सोमनाथ
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था और वर्ष 1951 में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद द्वारा इसकी प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई थी।
‘विकास भी, विरासत भी’ की सोच को मिली नई गति
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में ‘विकास भी, विरासत भी’ की अवधारणा को धरातल पर उतारा जा रहा है। अयोध्या में रामलला प्राण प्रतिष्ठा, काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, केदारधाम पुनर्विकास और महाकाल लोक जैसे प्रकल्प भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं और मंदिर के संरक्षण एवं विकास में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
धार्मिक पर्यटन और विरासत संरक्षण को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने पिछले सवा दो वर्षों में धार्मिक पर्यटन और आध्यात्मिक उत्थान को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। पुष्कर, खाटूश्यामजी, नाथद्वारा, डीग, चित्तौड़गढ़ और केशोरायपाटन जैसे धार्मिक स्थलों पर हेरिटेज वॉक-वे, मंदिर संरक्षण और आधारभूत सुविधाओं के विकास के कार्य किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति का मूल स्वभाव है कि हम झुकते नहीं, टूटते नहीं, बल्कि हर चुनौती के बाद और अधिक मजबूती से खड़े होते हैं। स्वच्छता, शिक्षा, महिला सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रसेवा हमारी सांस्कृतिक विरासत के मूल मूल्य हैं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान शिव का जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर कई मंत्री, विधायक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।