‘मैरून बेरेट’ पहनते ही बने भारत के सबसे खतरनाक योद्धा! गरुड़ कमांडोज़ की पासिंग आउट परेड ने दिखाया वायुसेना का दम
ऑपरेशन सिंदूर के बाद और मजबूत हुई एयरफोर्स की स्पेशल फोर्स… आखिर कैसी होती है गरुड़ कमांडोज़ की खतरनाक ट्रेनिंग?
अनन्य सोच। भारतीय वायु सेना की सबसे विशेष और खतरनाक यूनिट मानी जाने वाली ‘गरुड़ फोर्स’ में शामिल होने का सपना देखने वाले जवानों के लिए 23 मई 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया। Indian Air Force के गरुड़ रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर (GRTC), वायुसेना स्टेशन चांदीनगर में आयोजित मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड में युवा कमांडोज़ ने कठिन प्रशिक्षण पूरा कर देश की एलीट स्पेशल फोर्स में कदम रखा।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एयर वाइस मार्शल Rahul Gupta ने परेड का निरीक्षण किया और सफल प्रशिक्षुओं को मैरून बेरेट, गरुड़ प्रवीणता बैज और स्पेशल फोर्स टैब प्रदान किए। समारोह के दौरान कई जवानों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए ट्रॉफियां भी दी गईं।
ऐसे तैयार होते हैं ‘स्पेशल वॉर मशीन’
पासिंग आउट परेड के दौरान गरुड़ कमांडोज़ ने युद्धक फायरिंग, बंधक बचाव अभियान, विस्फोटक संचालन, बाधा पार करना, दीवार चढ़ाई, रस्सियों से उतरना और सैन्य मार्शल आर्ट जैसे हैरतअंगेज कौशल का प्रदर्शन किया। हर प्रदर्शन यह बता रहा था कि इन जवानों को केवल लड़ाई नहीं, बल्कि किसी भी परिस्थिति में मिशन पूरा करने के लिए तैयार किया जाता है।
सूत्रों के अनुसार गरुड़ फोर्स का प्रशिक्षण भारतीय सुरक्षा बलों में सबसे कठिन ट्रेनिंग प्रोग्राम्स में गिना जाता है। यही वजह है कि मैरून बेरेट केवल चुनिंदा और सर्वश्रेष्ठ प्रशिक्षुओं को ही मिलती है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
हाल ही में हुए “ऑपरेशन सिंदूर” में भारतीय वायु सेना के विशेष बलों की भूमिका चर्चा में रही थी। ऐसे में नए गरुड़ कमांडोज़ की यह पासिंग आउट परेड बेहद अहम मानी जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि ये युवा स्पेशल फोर्स ऑपरेटर्स आने वाले समय में एयरफोर्स की स्पेशल ऑपरेशन क्षमता को नई मजबूती देंगे।
मैरून बेरेट परेड केवल एक सैन्य समारोह नहीं, बल्कि उन जवानों के साहस, अनुशासन और बलिदान का प्रतीक है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए खुद को हर चुनौती के लिए तैयार किया है।