‘व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0’ से बदलेगी गांवों की तस्वीर! सरकार का बड़ा मास्टरप्लान, महिलाओं से लेकर किसानों तक खुलेंगे कमाई के नए रास्ते

75 हजार नई डेयरी समितियां, दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना और बायोगैस मॉडल… आखिर क्या है ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर बनाने की सीक्रेट रणनीति?

May 23, 2026 - 12:43
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‘व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0’ से बदलेगी गांवों की तस्वीर! सरकार का बड़ा मास्टरप्लान, महिलाओं से लेकर किसानों तक खुलेंगे कमाई के नए रास्ते

अनन्य सोच। देश के ग्रामीण इलाकों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत देने के लिए सहकारिता मंत्रालय ने बड़ा प्लान तैयार किया है। रायपुर में आयोजित क्षेत्रीय कार्यशाला में “व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0”, दुनिया की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना और 2 लाख नई सहकारी समितियों के गठन की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में यह साफ संकेत मिला कि आने वाले वर्षों में डेयरी, बायोगैस और सहकारी मॉडल गांवों की तस्वीर बदल सकते हैं।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए Narendra Modi के “सहकार से समृद्धि” विजन का उल्लेख करते हुए सहकारिता मंत्रालय के सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी ने कहा कि सहकारी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। उन्होंने बताया कि पूर्वी और मध्य भारत में डेयरी सेक्टर अपार संभावनाओं से भरा है और “व्हाइट रेवोल्यूशन 2.0” इन क्षेत्रों में समृद्धि के नए द्वार खोलेगा।

महिलाओं को ‘गृहिणी’ से ‘उद्यमी’ बनाने की तैयारी

बैठक में सबसे ज्यादा चर्चा डेयरी सहकारी समितियों की भूमिका को लेकर रही। अधिकारियों ने बताया कि महिलाएं अब केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि डेयरी सहकारी मॉडल के जरिए आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनेंगी। उन्हें संगठित बाजार, फाइनेंशियल सपोर्ट और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

75 हजार नई डेयरी समितियों का लक्ष्य

सहकारिता मंत्रालय ने अगले पांच वर्षों में 75 हजार नई डेयरी सहकारी समितियों के गठन और 46 हजार मौजूदा समितियों को मजबूत करने के लक्ष्य की समीक्षा की। साथ ही “सहकारिता में सहकार” मॉडल के जरिए गांवों तक वित्तीय सेवाएं, स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर और मार्केट कनेक्टिविटी पहुंचाने की रणनीति पर जोर दिया गया।

बायोगैस और सर्कुलर इकोनॉमी बनेगी नया हथियार

वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच मंत्रालय ने बायोगैस, ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर, कार्बन क्रेडिट और गोबरधन मॉडल को ग्रामीण आय बढ़ाने का बड़ा माध्यम बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की कमाई बढ़ने के साथ भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता भी मजबूत होगी।

कार्यशाला में नाबार्ड, एफसीआई, नेफेड और कई राष्ट्रीय संस्थाओं ने हिस्सा लिया। समापन सत्र में राज्यों के बीच बेहतर समन्वय और मिशन मोड में काम करने पर जोर दिया गया।