Rang Rajasthan festival: झिलमिल हजारिका ने अभिनेताओं को व्याख्यान और आवाज़ के गुर सिखाए

मीणा बाटी से हुआ रंग राजस्थान थियेटर फेस्टिवल का समापन – रंग राजस्थान के अंतिम दिन हुआ दो नाटकों का मंचन – नाटक बांदरवाल ने हाड़ौती के कवियों का दर्शन कराया – सामाजिक रूढ़ियों पर वार करता नाटक "किस्से किनारों के"

Feb 25, 2025 - 15:53
Feb 26, 2025 - 08:14
 0
Rang Rajasthan festival: झिलमिल हजारिका ने अभिनेताओं को व्याख्यान और आवाज़ के गुर सिखाए

Ananya soch: Rang Rajasthan festival

अनन्य सोच। जवाहर कला केंद्र और राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (Jawahar Kala Kendra and Rajasthan International Centre) में चल रहे दस दिवसीय थियेटर महोत्सव रंग राजस्थान (Ten-day theatre festival Rang Rajasthan) संपन्न हुआ. ये महोत्सव कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर, एवं जवाहर कला केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में  रंगमंच संस्था रंग मस्ताने द्वारा आयोजित कराया गया. महोत्सव के समापन दिवस पर 12 बजे से जवाहर कला केंद्र के अलंकार गैलरी में अभिनेत्री झिलमिल हजारिका की स्पीच और वॉयस पर मास्टरक्लास का आयोजन किया गया. मास्टरक्लास में अभिनेताओं ने अपनी आवाज़ को और बेहतर कैसे किया जा सकता है इसके गुर सीखे.
इसके बाद 3 बजे से जवाहर कला केंद्र के कृष्णायन सभागार में राजेंद्र पांचाल द्वारा निर्देशित नाटक बांदरवाल का मंचन हुआ. ये नाटक निर्देशक की अपनी मातृभाषा हाड़ौती के प्रति प्रेम को प्रकट करता है. निर्देशक स्वयं प्रस्तुति में उपस्थित रहकर अपनी भाषा के प्रसिद्ध कवियों की रचनाओं को साझा करता है. ये नाटक रघुराज सिंह हाड़ा, दुर्गादान सिंह गौड़, मुकुट मणिराज, गिरधारीलाल मालव, अम्बिकादत्त की रचनाओं को एक सूत्र में बांधती हुई प्रदर्शित होता है. शुभ कार्यों  में घर के दरवाजे पर बांधे जाने वाली झालर को बन्दनवार कहते हैं. श्रृंगार रस के गीतों की झालर को मंच पर प्रस्तुत करने के कारण इस प्रस्तुति को बान्दरवाळ नाम दिया है. 
फिर शाम 5 बजे से  रंगायन सभागार में अभिषेक गोस्वामी के निर्देशन में नाटक किस्से किनारों का मंचन हुआ. जयपुर की नाट्य संस्था ब्रीदिंग स्पेस का नया नाटक 'क़िस्से किनारों के'  अदम गोंडवी, प्रेमचंद, हीरा डोम, डॉ. भीमराव आंबेडकर, आशु ठाकुर, ओमप्रकाश वाल्मीकि और अली सरदार जाफ़री के साहित्य पर आधारित है. यह नाटक हाशिया समाज के जीवन के मार्मिक क्षणों के माध्यम से, सामाजिक रूढ़ियों पर वार करते हुए, दर्शकों से जीवन की मूलभूत जरूरत के लिए स्वतंत्रता पर पुनर्विचार करने पर मजबूर करता है. नाटक का निर्देशन एवं परिकल्पना अभिषेक गोस्वामी ने किया। आशु, आशीष, अनुप्रास, काजोल, हरिओम, प्रीति, निरंजन, सूरज, विभा, सोनू, यामिनी, प्रदीप्त, विजय, कमलेश, गर्वित, प्रशांत सम्पूर्ण मंचन टीम का हिस्सा रहे. शाम 7 बजे से जवाहर कला केंद्र के मध्यवर्ती में महोत्सव के समापन पर लोक कला प्रकार मीणा बाटी की प्रस्तुति रखी गई, जिसमें श्रोताओं ने खूब आनंद उठाया. इसके बाद रंग राजस्थान में सभी कार्यकर्ताओं को एक प्रशस्ति पत्र देकर उनका सम्मान किया गया.