डीजीपी राजीव कुमार शर्मा का सख्त संदेश— “बच्चों के शोषण पर जीरो टॉलरेंस”, पूरे जून चलेगा राजस्थान पुलिस का मेगा अभियान

राजस्थान में बाल तस्करों पर बड़ा शिकंजा: 1 जून से चलेगा ‘उमंग-VII’, ढाबों-होटलों से लेकर रेलवे प्लेटफॉर्म तक होगी सघन छापेमारी

May 28, 2026 - 10:33
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डीजीपी राजीव कुमार शर्मा का सख्त संदेश— “बच्चों के शोषण पर जीरो टॉलरेंस”, पूरे जून चलेगा राजस्थान पुलिस का मेगा अभियान

अनन्य सोच। राजस्थान में बालश्रम, बाल बंधुआ मजदूरी और बाल तस्करी के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू हो चुकी है। राजस्थान पुलिस 1 जून से 30 जून 2026 तक पूरे प्रदेश में विशेष अभियान “उमंग-VII” चलाने जा रही है। इस अभियान का मकसद सिर्फ बच्चों को शोषण से मुक्त कराना नहीं, बल्कि उन संगठित गिरोहों की कमर तोड़ना भी है जो मासूम बच्चों के भविष्य का सौदा कर रहे हैं।

पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर शुरू होने वाले इस राज्यव्यापी अभियान के तहत होटल, ढाबे, फैक्ट्रियां, ईंट-भट्टे, रेलवे प्लेटफॉर्म, बस स्टैंड, धार्मिक स्थल और हाईवे किनारे स्थित ढाबों पर सघन स्क्रीनिंग की जाएगी। पुलिस को आशंका है कि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में नाबालिग बच्चों से अवैध रूप से काम कराया जा रहा है।

अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (सिविल राइट्स एवं एएचटी) हवासिंह घुमरिया ने सभी पुलिस आयुक्तों, रेंज आईजी और जिला पुलिस अधीक्षकों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हर जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी को नोडल अधिकारी बनाया गया है, जो अभियान की निगरानी करेगा।

सबसे खास बात यह है कि इस बार अभियान को केवल पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा गया है। महिला एवं बाल विकास विभाग, श्रम विभाग, समाज कल्याण विभाग, बाल अधिकारिता विभाग, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी और कई एनजीओ को भी अभियान से जोड़ा गया है, ताकि बच्चों का रेस्क्यू और पुनर्वास संवेदनशील तरीके से हो सके।

थाना स्तर पर विशेष रेस्क्यू टीमें गठित की जाएंगी, जिनमें एसआई, एएसआई सहित चार पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। इन टीमों को पहले विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि बाल तस्करी और बालश्रम से जुड़े मामलों की पहचान तेजी से हो सके।

पुलिस मुख्यालय ने साफ निर्देश दिए हैं कि यदि किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), किशोर न्याय अधिनियम और बालश्रम प्रतिषेध अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। रेस्क्यू किए गए बच्चों का मेडिकल परीक्षण कराया जाएगा और जरूरत पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य जांच भी होगी।

राजस्थान पुलिस का मानना है कि “उमंग-VII” केवल एक अभियान नहीं, बल्कि बच्चों के सुरक्षित भविष्य की लड़ाई है। अब देखने वाली बात यह होगी कि इस अभियान के दौरान कितने बच्चों को शोषण की अंधेरी दुनिया से बाहर निकाला जा सकेगा और कितने तस्कर कानून के शिकंजे में आएंगे।