पर्यावरण संरक्षण की उड़ान: 43वीं सारस गणना ने बढ़ाया केवलादेव का गौरव
गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढ़म ने लिया कार्यक्रम में भाग साइबेरियन सारस की घटती संख्या पर जताई चिंता, पर्यटन व विकास योजनाओं को मिली गति
अनन्य सोच। गृह राज्यमंत्री Jawahar Singh Bedham ने भरतपुर के एक दिवसीय दौरे के दौरान Keoladeo National Park में आयोजित 43वीं सारस गणना कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। इस कार्यक्रम का आयोजन Keoladeo Natural History Society द्वारा किया गया।
राज्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले 43 वर्षों से निरंतर हो रही सारस गणना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह पहल केवल व्यक्तिगत लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि भरतपुर, राजस्थान और देश की राष्ट्रीय धरोहर के संरक्षण, विकास और समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने सोसायटी के अध्यक्ष Krishna Kumar Arora को बधाई देते हुए कहा कि पक्षियों और वन्यजीवों की इस अमूल्य धरोहर को संरक्षित करना हमारी संस्कृति, परंपरा और इतिहास को संजोने का अहम प्रयास है। इससे प्रकृति का संतुलन बना रहता है और मानव जीवन को भी स्थायित्व मिलता है।
राज्यमंत्री ने कहा कि UNESCO की विश्व धरोहर सूची में शामिल केवलादेव घना राष्ट्रीय उद्यान प्रदेश का गौरव है। हालांकि उन्होंने Siberian Crane की घटती संख्या पर चिंता व्यक्त करते हुए इसे गंभीर विषय बताया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग, कम वर्षा और जल की कमी इसके प्रमुख कारण हैं, जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन विकास के लिए भी निरंतर कार्य कर रही है। केवलादेव घना पक्षी विहार के अलावा Bandh Baretha, Deeg Water Palace तथा अन्य धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। इससे स्थानीय लोगों को गाइड, होटल और टैक्सी जैसी सेवाओं के माध्यम से रोजगार के अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने आगे बताया कि Vair White Palace और Phulwari के सौंदर्यकरण और जीर्णोद्धार के कार्य जारी हैं। वहीं, Bandh Baretha में बायोलॉजिकल पार्क और नगर वन विकसित किए जा रहे हैं, जो क्षेत्र में इको-टूरिज्म को बढ़ावा देंगे।
राज्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma के नेतृत्व में भरतपुर के समग्र विकास के लिए कई परियोजनाएं संचालित हो रही हैं। एक प्रमुख जल परियोजना के अंतर्गत भरतपुर, सीकरी, बंध बारैठा बांध, धौलपुर और अलवर सहित पूर्वी राजस्थान के 17 जिलों को जोड़ा गया है, जिससे सिंचाई, पेयजल, उद्योग और पर्यावरण संरक्षण के लिए जल उपलब्ध कराया जाएगा।
पुस्तक विमोचन एवं सारस गणना रिपोर्ट
इस अवसर पर राज्यमंत्री ने Dr. M.M. Trigunayat एवं Dr. Kritika Trigunayat द्वारा लिखित पुस्तक “पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण जैविकी” का विमोचन किया। कार्यक्रम के बाद उन्होंने सारस के नवजात चूजों का अवलोकन कर उनकी देखभाल के लिए वन विभाग को आवश्यक निर्देश दिए।
डीएफओ Chetan Kumar BV के अनुसार, 43वीं सारस गणना में घना पक्षी विहार में साइबेरियन सारस की संख्या 22 दर्ज की गई, जबकि भरतपुर और डीग के वेटलैंड क्षेत्रों में यह संख्या 79 से बढ़कर 81 हो गई है, जो संरक्षण प्रयासों के सकारात्मक परिणाम दर्शाती है।
यह आयोजन राजस्थान में पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रति बढ़ती प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरा है।