‘1900 रिश्तों’ ने बदल दी 11 बेटियों की किस्मत! नारी निकेतन में मिल रही नई जिंदगी, नया सम्मान और नया परिवार
कभी ठुकराई गईं ये बेटियां… आज बन रहीं आत्मनिर्भरता की मिसाल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल से बदली हजारों महिलाओं की जिंदगी
अनन्य सोच। समाज की बेरुखी, अपनों की बेदिली और हालात की मार झेल चुकी महिलाओं के लिए राजस्थान के नारी निकेतन अब सिर्फ आश्रय स्थल नहीं रहे, बल्कि उम्मीद, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बन चुके हैं। राजस्थान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा संचालित ये केंद्र आज उन महिलाओं के जीवन में नई रोशनी भर रहे हैं, जिन्होंने कभी जिंदगी से उम्मीद छोड़ दी थी।
मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma के संवेदनशील नेतृत्व और दूरदर्शी सोच के चलते प्रदेश के नारी निकेतन अब पुनर्वास और सशक्तिकरण के मॉडल के रूप में उभर रहे हैं। जयपुर में 150 क्षमता वाला राज्य महिला सदन और अन्य संभागीय मुख्यालयों पर 50-50 क्षमता वाले नारी निकेतन महिलाओं को सुरक्षित वातावरण, सम्मानजनक जीवन और आत्मनिर्भर बनने का अवसर दे रहे हैं।
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री Avinash Gehlot ने बताया कि इन संस्थानों में महिलाओं को निःशुल्क आवास, भोजन, वस्त्र और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इतना ही नहीं, एडवांस सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटीशियन और कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण देकर उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत भी बनाया जा रहा है। त्योहारों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिए यहां पारिवारिक माहौल तैयार किया जाता है, ताकि महिलाएं अकेलेपन से बाहर निकल सकें।
11 बेटियां… और 1900 से ज्यादा रिश्ते
हाल ही में जयपुर राज्य महिला सदन में उस वक्त भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब 11 युवतियों के विवाह के लिए जारी विज्ञप्ति पर प्रदेशभर से 1900 से अधिक शिक्षित और योग्य युवकों के आवेदन पहुंचे। विभाग ने पुलिस वेरिफिकेशन और पारिवारिक जांच के बाद ही वरों का चयन किया। इन शादियों का आयोजन भी किसी बड़े परिवार की तरह धूमधाम से किया गया, जहां मुख्यमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद ‘कन्यादान’ कर बेटियों को आशीर्वाद दिया।
ढाई साल में 16 करोड़ से ज्यादा खर्च
राज्य सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में 1006 महिलाओं के पुनर्वास और कल्याण पर 1613.35 लाख रुपए खर्च किए हैं। अब तक 30 से अधिक महिलाओं का विवाह के माध्यम से पुनर्वास किया जा चुका है, जबकि 218 महिलाओं को कौशल विकास प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है।
नारी निकेतन अब उन महिलाओं के लिए नया पता बन चुके हैं, जो कभी खुद को बेसहारा समझती थीं। यहां उन्हें सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि जिंदगी दोबारा जीने का साहस भी मिल रहा है।