जयपुर में सजेगा हथकरघा का रंगीन बाजार! 60 स्टॉल्स पर बुनकरों का हुनर देख रह जाएंगे दंग, राज्यवर्धन राठौड़ करेंगे शुभारंभ
कोटा डोरिया से लेकर मालानी पट्टू तक, तीन दिन तक जवाहर कला केंद्र में लगेगा राजस्थान की समृद्ध बुनाई विरासत का मेला, जीत सकेंगे बुनकरों की मेहनत का असली मोल
अनन्य सोच। राजस्थान की सदियों पुरानी हथकरघा परंपरा को नई पहचान देने के लिए राजधानी जयपुर में एक भव्य आयोजन होने जा रहा है। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ 7 अगस्त को जवाहर कला केंद्र (JKK) में राज्य स्तरीय National Handloom Day समारोह का उद्घाटन करेंगे। इस मौके पर प्रदेश भर के बुनकरों द्वारा तैयार किए गए बेहतरीन हथकरघा उत्पादों की एक शानदार Exhibition सजाई जाएगी, जो आमजन के लिए 9 अगस्त तक खुली रहेगी। लेकिन इस आयोजन में ऐसा क्या खास होगा, जो इसे बाकी मेलों से अलग बनाता है? आइए जानते हैं।
इस प्रदर्शनी में करीब 60 स्टॉल्स लगाए जाएंगे, जहां राज्य के विभिन्न जिलों से आए बुनकर कोटा डोरिया साड़ी, पंजा दरी, मालानी पट्टू, हैंडलूम बेडशीट, दुपट्टे, कुशन कवर, ऊनी वस्त्र और साफा-पगड़ी जैसे उत्पाद प्रदर्शित व विक्रय करेंगे। खास आकर्षण होगा भारत सरकार के बुनकर सेवा केंद्र द्वारा तैयार किया गया थीम पवेलियन, जिसमें पारंपरिक हथकरघा उपकरणों और हस्तनिर्मित वस्त्रों का अनूठा संगम देखने को मिलेगा।
इस मौके पर State Level Weaver Awards भी प्रदान किए जाएंगे। जालोर के कानाराम को कॉटन-सिल्क साड़ी के लिए प्रथम, नागौर के सोहनराम को कलात्मक दरी के लिए द्वितीय और झालावाड़ की धापूबाई को डबल बेडशीट के लिए तृतीय पुरस्कार मिलेगा। इसके अलावा जोधपुर और बाड़मेर के बुनकरों को भी सांत्वना पुरस्कार से नवाजा जाएगा।
बता दें कि 7 अगस्त, 1905 को कलकत्ता में हुए स्वदेशी आंदोलन की याद में भारत सरकार 2015 से हर साल इस दिन को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के रूप में मनाती है। देशभर में 35.22 लाख से ज्यादा हथकरघा बुनकर काम करते हैं, जिनमें 72 प्रतिशत महिलाएं हैं। राजस्थान में भी 8,770 बुनकर इस पारंपरिक उद्योग से जुड़े हैं। यह आयोजन राज्य की बुनाई विरासत को सहेजने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।