डीजल की मार से कराहे निजी बस ऑपरेटर: बोले- किराया नहीं बढ़ा तो थम सकते हैं पहिए
पड़ोसी राज्यों से कम किराया, बढ़ती लागत से टूट रही कमर; सरकार से वैट घटाने और सब्सिडी वाले डीजल की भी मांग
अनन्य सोच। राजस्थान में निजी बस यात्रियों के लिए आने वाले दिनों में सफर महंगा हो सकता है। लगातार बढ़ती डीजल कीमतों और संचालन लागत से परेशान निजी बस ऑपरेटरों ने अब खुलकर किराया बढ़ाने की मांग उठा दी है। बस ऑपरेटर एसोसिएशन, राजस्थान ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजकर चेतावनी दी है कि यदि जल्द राहत नहीं मिली तो राज्य की परिवहन सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि राजस्थान में निजी स्टेज कैरिज बसों का किराया पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी कम है, जबकि डीजल, मेंटेनेंस, टैक्स और कर्मचारियों पर होने वाला खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में बसों का संचालन करना दिन-प्रतिदिन मुश्किल होता जा रहा है। कई ऑपरेटर आर्थिक संकट से गुजर रहे हैं और कुछ रूट्स पर बसें चलाना घाटे का सौदा बन चुका है।
बस ऑपरेटरों ने सरकार के सामने दो बड़े विकल्प रखे हैं। पहला, निजी स्टेज कैरिज बसों के किराए में तुरंत बढ़ोतरी की जाए। दूसरा, डीजल पर वैट कम कर राहत दी जाए ताकि संचालन लागत कम हो सके। इसके साथ ही स्टेज कैरिज, ग्रामीण सेवा, लोक परिवहन और उपनगरीय बसों को सब्सिडी वाला डीजल उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई है।
एसोसिएशन का दावा है कि यदि समय रहते समाधान नहीं निकाला गया तो इसका सीधा असर आम यात्रियों पर पड़ेगा। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में परिवहन सेवाएं बाधित हो सकती हैं, जिससे हजारों यात्रियों की रोजमर्रा की आवाजाही प्रभावित होगी।
परिवहन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में सरकार इस मुद्दे पर बड़ा फैसला ले सकती है, क्योंकि निजी बसें राज्य के सार्वजनिक परिवहन तंत्र की अहम कड़ी मानी जाती हैं। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार राहत देती है या यात्रियों को महंगे सफर के लिए तैयार रहना पड़ेगा।