रामदेवरा में ‘मारवाड़ महासम्मेलन’ : जल समागम से एकता का संदेश, जातिवाद मिटाने का संकल्प

सर्वोदय कलश बना सामाजिक समरसता का प्रतीक, रोजगार-शिक्षा और पर्यावरण पर गहन मंथन

रामदेवरा में ‘मारवाड़ महासम्मेलन’ : जल समागम से एकता का संदेश, जातिवाद मिटाने का संकल्प
मारवाड़ महासम्मेलन: रामदेवरा में सर्व समाज का अनूठा एकता संगम, जल कलश से लिया जातिवाद के खात्मे का संकल्प

अनन्य सोच। पवित्र तीर्थ रामदेवरा में सामाजिक एकता मंच के तत्वावधान में रविवार को ऐतिहासिक ‘मारवाड़ महासम्मेलन’ आयोजित हुआ। कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता ‘जल समागम’ रही, जिसमें सभी वर्गों के लोगों ने अपने घरों से लाया जल एक ही ‘सर्वोदय कलश’ में प्रवाहित कर जातिवाद के समूल नाश का संकल्प लिया।

जल समागम: एकता का ऐतिहासिक क्षण
दोपहर में आयोजित इस भावुक क्षण में हजारों लोग बिना जाति-धर्म के भेदभाव के एकत्र हुए और समरसता का अद्भुत संदेश दिया। यह आयोजन मारवाड़ में सामाजिक जागरूकता की नई शुरुआत माना जा रहा है।

रोजगार और सौर ऊर्जा मॉडल पर जोर
उद्योगपति मेघराज सिंह रॉयल ने बेरोजगारी को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए सौर ऊर्जा आधारित रोजगार मॉडल प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि बंजर भूमि का उपयोग कर लाखों युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है। साथ ही पर्यटन और पारंपरिक कलाओं को भी रोजगार का मजबूत आधार बताया।

जातिवाद और तकनीकी चुनौतियों पर चिंता
रॉयल ने कहा कि जाति मूल रूप से कौशल आधारित थी, जिसे समय के साथ विकृत कर दिया गया। उन्होंने युवाओं को एआई जैसी तकनीकों से आने वाली चुनौतियों के प्रति सचेत रहने और स्थानीय व्यापार व हुनर को बढ़ावा देने की अपील की।

वक्ताओं ने दिया एकता और शिक्षा का संदेश
डॉ. विक्रांत सिंह तोमर, अरविंद सिंह भाटी, मुकेश मेघवाल और संत ओमदास महाराज सहित कई वक्ताओं ने शिक्षा, भाईचारे और सामाजिक एकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में लोक कला, डॉक्यूमेंट्री और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया।

महासम्मेलन ने स्पष्ट संदेश दिया कि यदि समाज एकजुट होकर शिक्षा, रोजगार और पर्यावरण पर कार्य करे, तो जातिवाद और बेरोजगारी जैसी समस्याओं को समाप्त किया जा सकता है।