जयपुर बनेगा रंगमंच का केंद्र: ‘तमस’ की टीस और ‘आधे अधूरे’ के रिश्तों की उलझनें करेंगी दर्शकों को भावुक
राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल का Summer Theatre Festival जयपुर पहुंचा, दो चर्चित नाटकों के मंचन को लेकर कला प्रेमियों में उत्साह
अनन्य सोच। राजस्थान की सांस्कृतिक राजधानी कहे जाने वाले जयपुर में इस सप्ताह रंगमंच का एक अनूठा उत्सव देखने को मिलेगा। National School of Drama Repertory Company (NSD Rangmandal) अपने प्रतिष्ठित Summer Theatre Festival 2026 के तहत दो बहुचर्चित नाटकों ‘विभाजन विभीषिका तमस’ और ‘आधे अधूरे’ का मंचन करने जा रही है। 6 और 7 जून को Rajasthan International Centre (RIC) में होने वाले इन प्रदर्शनों को लेकर कला प्रेमियों और रंगकर्मियों में खासा उत्साह है।
यह रंगमहोत्सव केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि इतिहास, समाज और मानवीय संवेदनाओं को समझने का अवसर भी होगा। भीष्म साहनी के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित ‘तमस’ देश के विभाजन की दर्दनाक त्रासदी, विस्थापन और सांप्रदायिक तनावों की गहरी पीड़ा को मंच पर जीवंत करेगा। निर्देशक चित्तारंजन त्रिपाठी के निर्देशन में तैयार यह प्रस्तुति दर्शकों को उस दौर में ले जाएगी, जिसने लाखों जिंदगियों को हमेशा के लिए बदल दिया।
नाटक की सबसे बड़ी विशेषता इसका भावनात्मक संगीत है, जिसमें संत कबीर की वाणियों और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की कविताओं का प्रभावशाली समावेश किया गया है। सशक्त अभिनय और प्रभावी मंच-सज्जा इसे और अधिक यादगार बनाती है।
वहीं, दूसरे दिन मंचित होने वाला ‘आधे अधूरे’ आधुनिक भारतीय रंगमंच की सबसे चर्चित कृतियों में गिना जाता है। मोहन राकेश द्वारा लिखित और दिवंगत रंगनिर्देशक त्रिपुरारी शर्मा के निर्देशन में तैयार इस नाटक का पुनर्मंचन विशेष महत्व रखता है। लगभग तीन दशक बाद इसके मूल कलाकार रवि खनविलकर और प्रतिमा कानन एक बार फिर अपने चर्चित किरदारों में नजर आएंगे।
मध्यमवर्गीय परिवार की टूटती संवेदनाओं, रिश्तों के तनाव और अधूरी इच्छाओं की कहानी कहने वाला यह नाटक आज भी उतना ही प्रासंगिक माना जाता है जितना अपने पहले मंचन के समय था।
देशभर में सराहे गए इन दोनों नाटकों का जयपुर आगमन शहर के सांस्कृतिक परिदृश्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि इतिहास की पीड़ा और वर्तमान समाज की जटिलताएं दर्शकों के दिलों को किस तरह छूती हैं।