सीमा पर बदल रही जिंदगी की तस्वीर! 184 गांवों में विकास का मेगा प्लान, अब सड़कों से लेकर इंटरनेट तक पहुंचेगी नई ताकत

राजस्थान के बॉर्डर गांवों को मिलेगा ‘वाइब्रेंट’ मॉडल: हर रणनीतिक गांव पर 3 करोड़ खर्च, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा खुद कर रहे मॉनिटरिंग

May 27, 2026 - 15:11
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सीमा पर बदल रही जिंदगी की तस्वीर! 184 गांवों में विकास का मेगा प्लान, अब सड़कों से लेकर इंटरनेट तक पहुंचेगी नई ताकत

अनन्य सोच। वर्षों तक विकास की मुख्यधारा से दूर रहे राजस्थान के सीमावर्ती गांव अब तेजी से बदलने वाले हैं। पाकिस्तान सीमा से सटे इलाकों में रहने वाले लोगों को अब बेहतर सड़क, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाएं मिलने जा रही हैं। केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त पहल के तहत शुरू किए गए वाईब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II ने सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास की नई उम्मीद जगा दी है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा स्वयं इस महत्वाकांक्षी योजना की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं और अधिकारियों को समयबद्ध व प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दे रहे हैं। सरकार का फोकस सिर्फ निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं, बल्कि सीमावर्ती गांवों को आत्मनिर्भर, सुरक्षित और आर्थिक रूप से मजबूत बनाने पर है।

5 जिलों के 184 गांव बने रणनीतिक केंद्र

योजना के तहत राजस्थान के 5 सीमावर्ती जिलों के 184 गांवों को रणनीतिक गांव के रूप में चुना गया है। इनमें श्रीगंगानगर के 68, बीकानेर के 46, बाड़मेर के 36, जैसलमेर के 30 और फलौदी जिले के 4 गांव शामिल हैं।

इन गांवों में सड़क संपर्क, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, बिजली, दूरसंचार, टीवी कनेक्टिविटी, पर्यटन, रोजगार और कौशल विकास जैसे कार्य किए जाएंगे। सरकार प्रत्येक रणनीतिक गांव में करीब 3 करोड़ रुपए खर्च करेगी। वर्तमान में 123 गांवों में 232 करोड़ रुपए से अधिक लागत के 515 विकास कार्य प्रस्तावित हैं।

सीमावर्ती इलाकों में इंटरनेट, सड़क और रोजगार पर फोकस

योजना के तहत सीमा ब्लॉकों के 3195 गांवों में सड़क संपर्क, दूरसंचार नेटवर्क, टीवी कनेक्टिविटी और ऑन-ग्रिड विद्युतीकरण सुनिश्चित किया जाएगा। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मजबूत आधारभूत ढांचा राष्ट्रीय सुरक्षा और स्थानीय आत्मविश्वास दोनों को मजबूत करेगा।

इसके साथ ही सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पर्यटन गतिविधियों, स्वयं सहायता समूहों, किसान उत्पाद संगठनों और युवा कौशल विकास को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

थार सीमा विकास कार्यक्रम से मिली नई रफ्तार

राज्य सरकार ने सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए मुख्यमंत्री थार सीमा विकास कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसके तहत 5 सीमावर्ती जिलों के 1206 गांवों के विकास के लिए हर साल 150 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

वर्ष 2025-26 में बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पशुपालन, खेल और पर्यटन से जुड़े 137 करोड़ रुपए के 1000 से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए हैं।

अब ‘अंतिम गांव’ नहीं, विकास की पहली कतार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “सीमावर्ती गांव देश के अंतिम नहीं, बल्कि प्रथम गांव हैं” की सोच को आगे बढ़ाते हुए राजस्थान सरकार इन इलाकों को विकास और सुरक्षा का नया मॉडल बनाने में जुटी है।

सीमा पर बसे गांवों में अब सिर्फ चौकसी नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और नए अवसरों की रोशनी भी दिखाई देने लगी है।