राजरंगम् के रंगमंच पर ‘फ्लर्ट’ ने बिखेरे प्रेम और भावनाओं के रंग

जवाहर कला केन्द्र में 8वें राजरंगम् फेस्टिवल का शानदार आगाज, प्रेम, अस्वीकार और संवेदनाओं की कहानी ने दर्शकों को किया भावुक

May 14, 2026 - 19:59
May 14, 2026 - 20:05
 0
राजरंगम् के रंगमंच पर ‘फ्लर्ट’ ने बिखेरे प्रेम और भावनाओं के रंग

अनन्य सोच। जवाहर कला केन्द्र में संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार और एक्टर्स थिएटर एट राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 8वें राजरंगम् फेस्टिवल का आगाज भावनाओं से भरपूर नाटक ‘फ्लर्ट’ के मंचन के साथ हुआ। पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार नरेन्द्र कोहली की कहानी पर आधारित इस नाटक का निर्देशन उस्ताद बिस्मिल्लाह खां अवॉर्ड से सम्मानित रंग निर्देशक गगन मिश्रा ने किया।

नाटक का नाट्य रूपांतरण विकास पारीक ने किया, जिसमें प्रेम की जटिल भावनाओं, सामाजिक संकोच और गलतफहमियों को बेहद संवेदनशील अंदाज में मंच पर प्रस्तुत किया गया। हास्य, रोमांस और भावुक दृश्यों से भरपूर इस प्रस्तुति ने दर्शकों को अंत तक बांधे रखा।

गीत-संगीत और हास्य के साथ शुरू हुआ नाटकीय सफर

नाटक की शुरुआत स्वरचित गीत और कलाकारों की जीवंत प्रस्तुति से होती है। रंगमंच पर जैसे ही ऑफिस का दृश्य साकार होता है, दर्शक कहानी के साथ जुड़ते चले जाते हैं। नाटक की मुख्य पात्र मालिनी एक खुशमिजाज, स्वतंत्र और खुले विचारों वाली युवती है। उसके सहकर्मी मिस्टर वर्मा उसकी मधुर बातचीत और सहज व्यवहार को प्रेम समझ बैठते हैं।

वर्मा बार-बार मालिनी को मूवी, रेस्टोरेंट और जन्मदिन की पार्टी में आमंत्रित करते हैं, लेकिन हर बार उन्हें अस्वीकार का सामना करना पड़ता है। दूसरी ओर, मालिनी अपने अन्य सहकर्मियों घोष और शुक्ला के साथ सहजता से घूमती-फिरती नजर आती है। यही बात वर्मा को भीतर तक परेशान करती है और उनका प्रेम धीरे-धीरे असुरक्षा और भ्रम में बदलने लगता है।

प्रेम, अस्वीकार और गलतफहमी का भावुक मोड़

कहानी का सबसे मार्मिक मोड़ तब आता है जब वर्मा अपने विवाह का निमंत्रण लेकर मालिनी के घर पहुंचते हैं। अब तक अपने भावों को सामाजिक मर्यादा और संकोच में छिपाकर रखने वाली मालिनी अचानक टूट जाती है। वह स्वीकार करती है कि वह भी वर्मा से बेहद प्रेम करती है, लेकिन लोकलाज और शर्म के कारण कभी अपने मन की बात नहीं कह पाई।

मालिनी का यह संवाद — “तुम्हारी शादी मेरे अलावा किसी और से कैसे हो सकती है” — दर्शकों को भावुक कर देता है। वहीं वर्मा का जवाब “अब तो मेरे रोने की बारी है” नाटक को एक गहरे भावनात्मक अंत तक पहुंचाता है। नाटक दर्शकों के सामने यह सवाल छोड़ जाता है कि प्रेम में चुप्पी और नजरअंदाजी को कब तक सही ठहराया जा सकता है।

कलाकारों की दमदार अदायगी ने जीता दिल

नाटक में प्रियदर्शिनी मिश्रा ने मालिनी और विशाल भट्ट ने वर्मा की भूमिका को प्रभावशाली ढंग से निभाया। अभिषेक झांकल ने झांकल और कोरस, महमूद अली ने घोष, हंगल और कोरस तथा गगन मिश्रा ने शुक्ला और पिताजी के किरदार में अपनी अभिनय क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया।

प्रकाश संयोजन विमल मीणा, ध्वनि संयोजन कमल और आशीष तथा मंच सज्जा अभिषेक और महमूद अली ने संभाली, जिसने प्रस्तुति को और अधिक प्रभावशाली बना दिया।

आज होंगे ‘गोपीचंद भर्तृहरि’ और ‘तार्तूफ’ के मंचन

महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह 10 बजे कृष्णायन में तमाशा साधक दिलीप भट्ट के निर्देशन में जयपुर की लोक नाट्य शैली पर आधारित तमाशा ‘गोपीचंद भर्तृहरि’ प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं सुबह 11:30 बजे ‘एक रंगकर्मी से वार्ता’ संगोष्ठी में चिन्मय दास और फेस्टिवल डायरेक्टर डॉ. चंद्रदीप हाड़ा चर्चा करेंगे। शाम 7 बजे चिन्मय दास के निर्देशन में हास्य-व्यंग्य नाटक ‘तार्तूफ’ का मंचन होगा।