नाटकवाला कला मंच पर गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती उत्साह और साहित्यिक रंगों के साथ मनाई गई

साहित्य, संगीत और रंगमंचीय प्रस्तुतियों से सजा समारोह

नाटकवाला कला मंच पर गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर जयंती उत्साह और साहित्यिक रंगों के साथ मनाई गई

अनन्य सोच। Natakwala Kala Manch की ओर से गुरुदेव Rabindranath Tagore की जयंती श्रद्धा, साहित्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हर्षोल्लासपूर्वक मनाई गई। कार्यक्रम का आयोजन आमेर स्थित नाटकवाला कला मंच पर किया गया, जहां कलाकारों और साहित्य प्रेमियों ने गुरुदेव को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

“एकला चलो रे” ने किया भावविभोर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रंगमंच कलाकार एवं स्वर्ण पदक विजेता Sunil Sogan रहे। समारोह की शुरुआत गुरुदेव टैगोर के चित्र पर दीप प्रज्वलन और माँ सरस्वती पूजन के साथ हुई।
इसके बाद सुनील सोगण ने गुरुदेव का अमर गीत “एकला चलो रे” प्रस्तुत कर उपस्थित दर्शकों को भावविभोर कर दिया। उन्होंने शायर Tahir Faraz की चर्चित कविता “दिन वो भी क्या थे जब हम अपने देश में रहते थे” का प्रभावशाली पाठ भी किया। साथ ही गुरुदेव के प्रसिद्ध उपन्यास “गोरा” का वाचन कर कार्यक्रम को साहित्यिक ऊंचाई प्रदान की।

युवा पीढ़ी तक पहुंचे टैगोर का साहित्य

अपने संबोधन में सुनील सोगण ने कहा कि आज के समय में गुरुदेव टैगोर के विचारों और साहित्य को युवा रंगकर्मियों तक पहुंचाना बेहद आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कलाकारों को केवल सरकारी आयोजनों की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए, बल्कि स्वयं आगे आकर साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि टैगोर के साहित्य, संगीत और नाट्य दृष्टि को आत्मसात कर बाल रंगमंच के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

“चंडालिका” को बताया सामाजिक चेतना का प्रतीक

कार्यक्रम का संचालन मंच के निदेशक Om Prakash Saini ने किया। बाल कलाकार अवनी सैनी और युग सैनी ने “जन गण मन” प्रस्तुत कर वातावरण को राष्ट्रभक्ति और साहित्यिक चेतना से ओतप्रोत कर दिया।
इस अवसर पर ओम प्रकाश सैनी ने गुरुदेव रचित नाटक “चंडालिका” से अपने दस वर्षों के जुड़ाव का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नाटक छुआछूत, असमानता और आत्मसम्मान की लड़ाई का सशक्त दस्तावेज है। उन्होंने भविष्य में “चंडालिका” का बड़े मंचों पर भव्य प्रस्तुतीकरण करने की इच्छा भी जताई।

कलाकारों ने लिया संस्कृति संरक्षण का संकल्प

कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों और साहित्य प्रेमियों ने गुरुदेव टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी तथा संकल्प लिया कि वे आगे भी साहित्यकारों और महान विभूतियों की जयंती मनाकर नई पीढ़ी को रंगमंच और संस्कृति से जोड़ने का कार्य निरंतर करते रहेंगे।